गोवंश संरक्षण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं; प्रदेशभर की गौशालाओं की नियमित निगरानी के निर्देश

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी लखनऊ-उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गौशालाओं में गोवंश के संरक्षण, देखभाल एवं व्यवस्थाओं में लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। बदायूँ जनपद के दो खंड विकास अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की गई है,। कासगंज जनपद के पटियाली विकास खंड के खंड विकास अधिकारी श्री संजीव कुमार को कथित वीडियो प्रकरण के संबंध में निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।*
श्री मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के उच्चाधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रदेश की सभी गौशालाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। जहां भी अव्यवस्था, अनियमितता, संसाधनों की कमी अथवा गोवंश की देखभाल में लापरवाही सामने आए, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
श्री मौर्य ने बदायूँ जनपद के म्याऊँ विकास खंड के खंड विकास अधिकारी श्री राकेश कुमार निराला को अभिगांव गौशाला में 20 गोवंश की मृत्यु के मामले में प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाया गया है। गौशाला की निर्धारित क्षमता 100 गोवंश होने के बावजूद वहां 428 गोवंश संरक्षित पाए गए। जनपद में पूर्व से रेड अलर्ट जारी होने के बावजूद अस्थायी व्यवस्था एवं अतिरिक्त शेड की व्यवस्था नहीं कराए जाने को गंभीर लापरवाही माना गया है। इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करते हुए संयुक्त विकास आयुक्त, बरेली मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
इसी प्रकार, बदायूँ के सालारपुर विकास खंड के खंड विकास अधिकारी श्री नितिन कुमार के विरुद्ध गौशाला में 14 गोवंश की मृत्यु एवं लापरवाही के मामले में अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित की गई है। एक कथित वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए श्री मौर्य ने कासगंज जनपद के पटियाली विकास खंड के खंड विकास अधिकारी श्री संजीव कुमार से संबंधित सामने आने के बाद प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के संकेतों को देखते हुए उन्हें निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि गोवंश संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। गौशालाओं में चारा, पानी, पर्याप्त शेड, स्वच्छता तथा पशुओं की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। किसी भी अधिकारी के कार्य में लापरवाही, अनियमितता, भ्रष्टाचार अथवा नियमों के विरुद्ध कार्य पाए जाने पर नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गौशालाओं का नियमित स्थलीय निरीक्षण करें, कमियों को तत्काल दूर कराएं तथा गोवंश के संरक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही न होने दें।







