पर्युषण पर्व के पांचवें दिन ‘अणुव्रत चेतना दिवस’ पर गूंजा संयम और सदाचार का मंत्र

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी बोकारो : जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा, चास-बोकारो की ओर से पर्युषण पर्व के पांचवें दिन शनिवार को ‘अणुव्रत चेतना दिवस’ उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर चास स्थित माणिक चंद छल्लानी के आवास पर एक विशेष प्रवचन सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की अच्छी उपस्थिति रही। सत्र में पधारीं उपासिका  शांति गुजरानी और सहयोगिनी सुश्री निहारिका सिंघी ने अणुव्रत के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तेरापंथ के नौवें आचार्य श्री तुलसी द्वारा शुरू किया गया अणुव्रत आंदोलन मुख्य रूप से चरित्र-निर्माण का एक ऐसा अभियान है, जो कथनी और करनी की समानता तथा ज्ञान व आचरण के बीच की दूरी को कम करता है। यह जीवन-विकास का प्रारंभ और हमारी आंतरिक शक्तियों को जागृत करने का दिव्य मंत्र है। अणुव्रत की आधारशिला ‘संयम’ है और यह आचरण की शुद्धि का उपक्रम होने के साथ-साथ वास्तविक मानव धर्म भी है। वक्ताओं ने आगे बताया कि अणुव्रत जीवन की आवश्यकताओं का अल्पीकरण करने और प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ने का सरलतम माध्यम है। यह अहिंसा, शांति, पवित्रता और अच्छे चरित्र का उद्गम स्थल है, जो व्यक्ति को पतन के मार्ग से बचाकर सन्मार्ग पर स्थापित करता है। व्यसनमुक्त जीवन ही अणुव्रत का आदर्श है। अणुव्रत के तीन प्रमुख उद्देश्यों में व्यक्ति को चरित्रवान बनाना, आचरण व व्यवहार की शुद्धि करना और धर्म समन्वय स्थापित करना शामिल है। जिस प्रकार अणु का एक छोटा सा कण अपार ऊर्जा दे सकता है, उसी प्रकार अणुव्रत के छोटे-छोटे नियम इंसान की बड़ी से बड़ी समस्याओं को सुलझा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान अणुव्रत के 11 प्रमुख नियमों की जानकारी दी गई, जो दैनिक जीवन में अनुशासन लाते हैं। इनमें किसी भी निरपराध प्राणी का संकल्पपूर्वक वध या आत्महत्या न करना, भ्रूण-हत्या न करना तथा किसी भी प्रकार के आक्रमण और आक्रामक नीतियों का समर्थन या उनमें सहभागिता न करना शामिल है। इसके अलावा विश्व-शांति और नि:शस्त्रीकरण के लिए निरंतर प्रयास करना, हिंसक उपद्रवों और तोड़फोड़ की प्रवृत्तियों से दूर रहना, मानवीय एकता में अटूट विश्वास रखना तथा जाति, रंग आदि के आधार पर किसी को ऊंच-नीच या अस्पृश्य न मानना बताया गया। साथ ही धार्मिक सहिष्णुता का भाव बनाए रखने, व्यवसाय और व्यवहार में पूरी तरह प्रामाणिक रहने, अपने लाभ के लिए दूसरों को हानि न पहुंचाने, छल-कपटपूर्ण व्यवहार से बचने, ब्रह्मचर्य की साधना करने और संग्रह की सीमा निर्धारित करने पर जोर दिया गया। जैन विदुषियों ने सभी को एक आदर्श, संयमित व अनुशासित जीवन शैली अपनाने की गहरी प्रेरणा दी। इस अवसर पर सरोज छल्लानी, अरिहंत जैन, विनोद चोपड़ा, मदन चौरड़िया, सुशील बैद, बजरंग लाल चौरड़िया, शांतिलाल लोढा, श्रेयांश चौरड़िया, आदित्य चौरड़िया, सिद्धार्थ चौरड़िया, कनक जैन, अलका चौरड़िया, सुमन, विनीता बैद, सुनीता कोठारी सहित तेरापंथ समाज के दर्जनों लोग उपस्थित थे। इस आशय की जानकारी जैन समाज की ओर से तेरापंथ समाज के मीडिया प्रभारी सुरेश बोथरा ने दी।

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