दिल्ली में बस मार्शलों की बहाली के मुद्दे पर सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर यूटर्न का लगाया आरोप

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली में बस मार्शलों की बहाली के मुद्दे पर एक बार फिर से सियासी रार देखने को मिल रही है।

बस मार्शलों की बहाली मामले पर दिल्ली सरकार में मंत्री और आप के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, मेरा मानना है कि ये धोखे के सिवाय कुछ नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के सभी विधायकों ने वोट डाल के यह प्रस्ताव पास किया था कि तीन अक्टूबर को सभी पार्टियों के विधायक और सरकार के मंत्री एलजी से मिलने जाएंगे और बहाली का मुद्दा उठाएंगे। अब भाजपा ने इस मामले पर यूटर्न ले लिया है।

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के दूसरे सरकारी घर में शिफ्ट होने को लेकर उन्होंने कहा कि, भारतीय जनता पार्टी के नेता दफ्तर के पते पर रहते हैं। ऐसे में उनको कोई हक नहीं है कि वह किसी तरह की बयानबाजी अरविंद केजरीवाल को लेकर करें। भाजपा इल्जाम लगाने में माहिर है। सरकार में रहते हुए ये लोग विपक्ष की अवाज दबाना चाहते हैं।

आप संयोजक अरविंद केजरीवाल 6 अक्टूबर को ‘जनता की अदालत’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसको लेकर भाजपा प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने कहा कि, छत्रसाल स्टेडियम में अन्ना हजारे का आंदोलन हुआ था। बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। उसका मकसद भ्रष्टाचार मुक्त भारत था। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप में जमानत पर बाहर निकले केजरीवाल और उनके अन्य साथी खुद को बचाने के लिए छत्रसाल में एकत्र होकर जनता दरबार लगा रहे हैं। वो दिल्ली की जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। वह गुनहगार हैं या नहीं इसका फैसला अदालत करेगी।

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केजरीवाल की ओर से राजधानी दिल्ली में बिगड़ती कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाए जाने को लेकर शाजिया इल्मी ने कहा कि, अरविंद केजरीवाल को पता है की दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है, दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है। उनको मालूम है कि एलजी साहब का यहां क्या रोल है और मुख्यमंत्री की क्या भूमिका होती है, ऐसे में वो बार-बार इस बात को क्यों उठाते हैं। उन्होंने पहले मांग की थी कि इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए, लेकिन वो समझ गए कि ये संवैधानिक तौर पर संभव नहीं है। अब तक जितने भी एलजी नियुक्त हुए, केजरीवाल को उन सभी से दिक्कत रही है। जिन बातों के लिए उनको जिम्मेदारी लेनी चाहिए, उसके लिए वह उपराज्यपाल पर दोष मढ़ देते हैं। ऐसे लोगों को सरकार में बने रहने का हक नहीं है।

–आईएएनएस

एकेएस/जीकेटी

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