अवैध तरीके से ली गई जमीन को लौटाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा : लहर सिंह सिरोया

बेंगलुरु, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र राहुल खड़गे ने रविवार को कर्नाटक औद्योगिक विकास बोर्ड (केआईएडीबी) के सीईओ को पत्र लिखकर अपने ट्रस्ट सिद्धार्थ विहार को आवंटित की गई पांच एकड़ भूमि का स्वामित्व रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने इस भूमि से संबंधित अपना प्रस्ताव बोर्ड से वापस लेने और बहु कौशल विकास केंद्र और अनुसंधान केंद्र के लिए अनुरोधित सीए साइट के आवंटन को रद्द करने की भी अपील की थी। इस पर कर्नाटक से भाजपा के राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने इससे जुड़े सभी मामलों की जांच होने की बात कही है।

उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मुझे विश्वास था कि यह मुद्दा सही है, और इसलिए जमीन वापस लौटाई गई। लेकिन मेरा मूल प्रश्न अब भी बना हुआ है कि क्या और भी जमीनें लौटाई गई हैं, जिनका आरोप लगाया गया है और जो राज्यपाल के पास याचिका पेंडिंग पड़ी हुई हैं, इन सभी की जांच होनी चाहिए। लौटाना या न लौटाना अलग बात है, लेकिन जिस तरीके से जमीन लौटाई जा रही है, वह प्रशासन पर दबाव डालने जैसा लगता है। जमीन लेना और वापस देना अब घरेलू काम बन गया है, जो सही नहीं है। खासकर जब कोर्ट में मुडा का मामला चल रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में जमीन का लेन-देन कोर्ट के माध्यम से होना चाहिए। इन्होंने जब अवैध तरीके से जमीन ली है तो अब लौटाने का कोई फायदा ही नहीं है। मैं राज्यपाल से आग्रह करता हूं कि पिछले वर्षों में अलॉट की गई जमीनों की भी जांच होनी चाहिए। हमारे पास दस्तावेज हैं कि 19 एकड़ जमीन, जो उन्होंने ट्रस्ट के लिए गुलबर्गा में ली, वह नाजायज तरीके से हासिल की गई है। इसे भी वापस लौटाना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके साथियों ने हमेशा सरकार से फायदा उठाने के लिए जमीनें अलॉट करवाई हैं। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि पिछले 10-15 वर्षों में खड़गे परिवार और उनके ट्रस्ट को कितनी जमीन अलॉट की गई।

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उन्होंने कहा, “जमीन का लेन-देन कैसे हुआ, यह जांच का विषय है। दूसरी बात, उनकी विस्तृत जांच होनी चाहिए कि उन्होंने और कितनी जमीन ले रखी है। वह इस मामले में फंस चुके हैं। उनकी वजह से दलित मूवमेंट को काफी धक्का लगा है। मल्लिकार्जुन खड़गे को मैं यह बताना चाहता हूं कि दलितों के नाम पर जो जमीनें दी गई थीं, उन्हें उनके लोगों ने हड़प लिया है। इस कारण दलित आंदोलन को बड़ा धक्का लगा है। जो कानून अंबेडकर जी ने बनाए थे, उनका लाभ दलितों को नहीं मिल पा रहा। इसलिए, मल्लिकार्जुन खड़गे क्रीमी लेयर का विरोध करते हैं। राजनीति में वह फंस चुके हैं और उन्हें जनता को जवाब देना होगा।”

उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते, उन्हें अपनी स्थिति का सम्मान करते हुए जांच का सामना करना चाहिए। उन्हें राज्यसभा में विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा देना चाहिए और अपनी पार्टी को इस संकट से निकालने के लिए जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”

–आईएएनएस

पीएसएम/एएस

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