उत्तर प्रदेश राज्य संग्रहालय में 10 दिवसीय कला पाठ्यक्रम संपन्न, देशभर के प्रतिभागियों ने दिखाई प्रतिभा

Media House लखनऊ-उत्तर प्रदेश राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आयोजित ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का समापन समारोह एवं प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम 27 फरवरी 2026 को आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संग्रहालय के सभागार में संपन्न हुआ। दस दिवसीय इस पाठ्यक्रम में प्रतिभागियों को कला, संस्कृति और विरासत से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई।

इस पाठ्यक्रम में देशभर से आए सौ से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हुए। प्रतिभागियों को उनकी शानदार प्रस्तुति के लिए सम्मानित भी किया गया। अतिका वर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि कशिश चौधरी को द्वितीय और कुलदीप सिंह को तृतीय स्थान मिला। वहीं प्रिया तिवारी और ऋचा मेहरोत्रा को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया। प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और कला क्षेत्र में उनके योगदान एवं रुचि की सराहना की गई।

विजेता प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस पाठ्यक्रम में देशभर से आए प्रतिभागियों ने उत्साह और समर्पण के साथ भाग लिया, जो इसकी लोकप्रियता और महत्व को दर्शाता है। उन्होंने बताया इस तरह के प्रयासों का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, बल्कि युवाओं और कला प्रेमियों में सांस्कृतिक जागरूकता को सशक्त बनाना है। साथ ही उन्हें प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और कलात्मक धरोहर से जोड़कर नई पीढ़ी में अपनी जड़ों के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

“संग्रहालय की वस्तुओं का निवारक संरक्षण” विषय पर मुख्य वक्ता धर्मेंद्र मिश्रा ने विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने चम्बा रूमाल, लेड ऑब्जेक्ट, टेराकोटा, ग्लास वर्क और वॉल पेंटिंग जैसी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही इन वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सावधानियों और आधुनिक तरीकों पर भी प्रकाश डाला।

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संस्कृति विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं और कला प्रेमियों में सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से उन्हें प्रदेश की समृद्ध विरासत, परंपराओं और कला से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल नई पीढ़ी में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति समझ और गर्व की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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