खाद्य संयम दिवस’ से पर्युषण महापर्व शुरू, नौ दिनों तक बहेगी आध्यात्मिक ज्ञान की सरिता

थाली से शुरू हो जीवन में आत्म-संयम का प्रयास

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी बोकारो: जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन…” की सनातन और आध्यात्मिक चेतना के साथ श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा (चास-बोकारो) के तत्वावधान में जैन धर्मावलंबियों का नौदिवसीय आत्म-साधना, तप और त्याग का महापर्व ‘पर्युषण’ मंगलवार को श्रद्धा व उल्लास के साथ शुरू हुआ। चास स्थित पुराना कुलदीप टॉकीज कॉम्प्लेक्स स्थित माणकचंद छल्लानी निवास पर आयोजित इस पावन अनुष्ठान का भव्य आगाज ‘खाद्य संयम दिवस’ के रूप में किया गया।

परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी की महती अनुकंपा से चास-बोकारो समाज में धर्म की अलख जगाने हेतु विशेष रूप से पधारीं विदुषी उपासिका शांति गुजरानी एवं सहयोगी निहारिका सिंघी, सीपीएस जोनल ट्रेनर के सान्निध्य में यह नौदिवसीय महापर्व 8 से 16 सितंबर 2026 तक संचालित होगा। इस दौरान प्रतिदिन प्रवचन एवं प्रतिक्रमण का आयोजन किया जा रहा है।

*रागादि शत्रुओं पर विजय का पर्व है _ पर्युषण*

उपासिका शांति गुजरानी ने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए संभवायांग सूत्र का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर ने चातुर्मास के 50 दिन व्यतीत होने और 70 दिन अवशेष रहने पर इस महापर्व की आराधना की परंपरा स्थापित की थी। उन्होंने कहा कि जैसे किसी बलवान शत्रु पर विजय पाने के लिए बल-संचय आवश्यक है, ठीक उसी प्रकार काम, क्रोध और राग-द्वेष जैसे आंतरिक शत्रुओं के शमन के लिए यह पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा संचित करने का अवसर है। उन्होंने बताया कि पर्युषण के दौरान श्रावक को प्रतिदिन तीन सामायिक, एक से दो घंटे का मौन, एक घंटा स्वाध्याय, नौ द्रव्यों से अधिक भोग-उपभोग का त्याग, सचित्त व जमीकंद का परिहार, रात्रि भोजन त्याग और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए जीवन को अनुशासित बनाना चाहिए। यह पर्व केवल जैन धर्म का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव संस्कृति के कल्याण का पर्व है।

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*खाद्य संयम क्यों जरूरी है ?*
*खाने का विवेक- क्या, कैसे, कब और कितना भोजन करें।*

सुश्री निहारिका सिंघी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में पर्युषण को आत्मशोधन का सबसे सशक्त माध्यम निरूपित करते हुए कहा कि खाद्य संयम केवल यह तय करना नहीं है कि हम क्या खाएँ, बल्कि यह चिंतन है कि हम कितना, क्यों और किस भाव से खाएँ। आधुनिक बुफे संस्कृति, ऑनलाइन फूड डिलीवरी और स्वाद के प्रति बढ़ते अंधानुकरण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि हमारा शरीर एक अनमोल वाहन है और भोजन उसका ईंधन। जिस प्रकार गलत ईंधन से वाहन खराब हो जाता है, उसी प्रकार केवल जिह्वा के स्वाद के लिए किया गया असंतुलित भोजन मन और विचारों को दूषित करता है। आज जीभ की लालसा और शरीर की वास्तविक आवश्यकता के बीच के अंतर को समझना अनिवार्य है। अहिंसक आहार, भोजन के प्रति कृतज्ञता और बर्बादी को रोकना ही सच्चा खाद्य संयम है। उन्होंने दैनिक जीवन में संयम के लिए कुछ व्यावहारिक सूत्र भी दिए— जैसे भूख और स्वाद की इच्छा में अंतर समझना, भोजन करते समय मोबाइल से दूरी बनाना, भोजन को धीरे-धीरे चबाना तथा आवश्यकतानुसार ही थाली में भोजन लेना।

*आज मनाया जाएगा ‘स्वाध्याय दिवस’*
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया प्रमुख सुरेश बोथरा ने बताया कि पर्युषण महापर्व की अगली कड़ी में 09 सितंबर को ‘स्वाध्याय दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें आत्म-चिंतन और जैन आगमों के अध्ययन पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। इस अवसर पर माणकचंद छल्लानी, शांति लाल, अभय बेगवानी, राजेश कोठारी, अनिल बैद, विनोद चोपड़ा, कनक जैन, ललिता चोपड़ा, किरण पारीख, सरोज छल्लानी सहित तेरापंथ समाज के अनेक गणमान्य प्रबुद्धजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे परिसर में भक्ति, तप और संयम का अद्भुत वातावरण बना हुआ है।

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