विश्व स्तरीय डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के बाद भारत अब रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में उठा रहा बड़े कदम: एन चंद्रशेखरन

नई दिल्ली, 5 जनवरी (आईएएनएस)। विश्व स्तरीय डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के बाद भारत रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेजी से कार्य कर रहा है। यह बयान टाटा ग्रुप के चेयरपर्सन एन चंद्रशेखरन द्वारा दिया गया।

देश में रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 214 गीगावाट पर पहुंच गई है और 2030 तक 500 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता विकसित करने के लक्ष्य की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

चेन्नई में एनआईटी त्रिची के ‘ग्लोबल एलुमनाई मीट (जीएएम) 2025’ को संबोधित करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि हमारी रिन्यूएबल आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले दशक में लगभग 30 प्रतिशत थी।

उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि यह पर्याप्त नहीं है क्योंकि अगर आपको पेरिस में तय किए गए 1.5 डिग्री के लक्ष्य को हासिल करना है तो इस दशक में वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 43 प्रतिशत की कमी लानी होगी। इसके उल्टा 2019 से 2024 के बीच हम दूसरी दिशा में चले गए हैं, इसमें 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि इस योजना के तहत 6.85 लाख से ज्यादा इंस्टॉलेशन हुए हैं और यह लगभग एक साल में एक दशक की गई सौर वृद्धि को पार करने की दहलीज पर है। इस साल फरवरी में लॉन्च होने के बाद से 6,85,763 इंस्टॉलेशन के साथ यह योजना पहले ही एक दशक में लगाए गए इंस्टॉलेशन के 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

टाटा समूह की चेयरपर्सन के अनुसार, इस देश में बनाया गया डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी अन्य देश की तुलना में कहीं आगे है।

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उन्होंने कहा, “हमारे पास कुछ बेहतरीन डिजिटल सिस्टम हैं, चाहे वह हमारी भुगतान प्रणाली हो, आधार हो, स्वास्थ्य सेवा हो, निपटान प्रणाली हो या खुदरा बैंकिंग प्रणाली हो। हमारे पास कुछ बेहतरीन डिजिटल सिस्टम हैं। साथ ही बेहतर प्रतिभा भी है।”

चंद्रशेखरन ने आगे कहा कि इस साल विकास में नरमी के बावजूद, भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। हालांकि, विकास दर में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन हमारे देश की अर्थव्यवस्था अन्य देशों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

चंद्रशेखरन ने कहा कि 2025 ‘एआई के लिए एक अभूतपूर्व वर्ष’ होने जा रहा है, जिसमें वर्ष के दौरान स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (एसएलएम) में भारी निवेश होने की उम्मीद है, जबकि लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) भी अपनी भूमिका निभाएंगे।

–आईएएनएस

एबीएस/

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