आजादी के 75 साल बाद भी प्रस्तर स्तंभ से नदारत है इस सेनानी का नाम।

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 13ता.सोनभद्र-आजाद भारत के रॉबर्ट्सगंज टाउन एरिया के प्रथम चेयरमैन, सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी, देशभक्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाजसेवी, सोनभद्र जनपद के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रथम पंक्ति में दर्ज इस सेनानी का क्रांतिकारी विवरण उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्रकाशित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का संक्षिप्त परिचय, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रो0 विश्राम सिंह द्वारा लिखित मिर्जापुर के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास सहित अन्य पुस्तकों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।
आजादी के 75 वर्षों बाद पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव बड़े भव्यता के साथ मनाया गया और सोनभद्र जनपद में तिरंगा यात्रा, संगोष्ठी, जुलूस, आदि के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया गया। शासन- प्रशासन द्वारा इन सेनानियों के त्याग, तपस्या, बलिदान को अक्षुण बनाएं रखने के लिए अनेक घोषणाएं की गई, जिनमें बलराम दास केसरवानी के नाम पर सोनभद्र बस डिपो का नामकरण किये जाने का प्रस्ताव भी उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया। लेकिन इसके बावजूद अभी तक यह कार्य पूरा नहीं हो सका। इस महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर आजादी के 75 साल बाद भी कोई द्वार,स्मारक, किसी भी संस्थान का नामकरण नहीं किया गया। आश्चर्य तो तब होता है जब नगर पालिका परिषद द्वारा निर्मित नेहरू पार्क में लगे गौरव स्तंभ पर रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सूची में इस महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का नाम दर्ज नहीं है।
ऐतिहासिक, पुरातात्विक, स्थलों के संरक्षण, संवर्धन, पर्यटन विकास के क्षेत्र में अनवरत ढाई दशकों से कार्यरत विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/ इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी द्वारा पत्र के माध्यम से सूबे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का ध्यान इस प्रकरण की ओर आकृष्ट कराया जा चुका है, बावजूद इसके अभी तक इस महान सेनानी का नाम इस प्रस्तर स्तंभ पर अंकित नहीं हुआ।
महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए स्वतंत्रता आंदोलन 1921 से 1947 तक सभी स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने वाले बलराम दास केसरवानी शिक्षा के प्रति जागरूक, समाजसेवी थे सन 1925 में संस्कृत पाठशाला स्थापना की।
15 अगस्त 1947 को बलराम बास केसरवानी के नेतृत्व में कांग्रेस कमेटी कार्यालय से एक भव्य जुलूस निकाला गया जो नगर भ्रमण करते हुए कंपनी बाग पहुंचा जहां पर बलराम दास केसरवानी ने ध्वजारोहण किया और उपस्थित आन्दोलनकारी शिवशंकर प्रसाद केसरवानी, चंद्रशेखर वैद्य, अली हुसैन उर्फ बेचू, मोहन लाल गुप्त सहित अन्य लोगो ने एक उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना का संकल्प दुहराया और उसी दिन मिडिल स्कूल को दो कमरा किराये पर लेकर कक्षा-9 की कक्षा आरम्भ कराया गया और मौला बख्स को प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया। (आज यही शिक्षण संस्थान राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के नाम से संचालित है।) तत्पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया एवं नगर को दीपक से सजाया गया।
सन् 1948 ई. में हुए टाउन ऐरिया चुनाव मे राबर्ट्सगंज की जनता ने चेयरमैन चुना। इनके कार्यकाल में नगर की सफाई व प्रकाश व्यवस्था आजादी के बाद सुनिश्चित हुई, आजाद भारत के राबर्ट्सगंज टाउन एरिया के प्रथम चेयरमैन का कार्यकाल 5 वर्षों रहा।
स्वाधीनता के बाद इन्होंने कोई सरकारी सहायता, पद स्वीकार नही किया आजादी के बाद देश की राजनीति में आये परिवर्तन के उन्होंने राजनीति से संन्यास के लिए।
वर्तमान राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज की स्थापना, विकास, नगर के निवासियों की सुविधा के लिए तालाब, पोखरा, धर्मशाला मूक छविगृह, धर्मशाला आदि का निर्माण करने वाले बलराम दास केसरवानी का नाम भले ही इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो लेकिन प्रत्यक्ष रूप से कुछ प्रदर्शित नहीं होता।
स्थानीय निवासियों ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह मांग किया कि चाचा नेहरू पार्क में क्रांतिकारी बलराम दास केसरवानी की आदमकद की प्रतिमा की स्थापना, प्रस्तर स्तंभ पर बलराम दास केसरवानी सहित मिर्जापुर के गांधी कहे जाने वाले पंडित महादेव चौबे, चंद्रशेखर वैद्य, अली हुसैन उर्फ बेचू का नाम दर्ज कराते हुए, पूर्व में शासन में विचाराधीन सोनभद्र बस डिपो का नामकरण क्रांतिकारी बलराम दास केसरवानी के नाम पर करते हुए, नगर के धर्मशाला चौराहा पर एक प्रवेश द्वार एवं सड़क का नामकरण कराया जाए यही आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में सेनानी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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