“हिंदी विश्व की सबसे समृद्ध भाषा- फादर निर्दोष एक्का”

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 14ता.बतौली– उपरोक्त कथन 14 सितंबर को शासकीय महाविद्यालय बतौली (सरगुजा) में हिंदी दिवस पर आयोजित व्याख्यान माला में फादर निर्दोष एक्का ने कही। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी विश्व की सबसे समृद्ध भाषाओं में से एक है जो भारत में आम जनता के विचार अभिव्यक्ति के साथ संपर्क भाषा के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। व्याख्यान माला की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर त्रिपाठी ने किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर साहित्यकार एवं समाजसेवी जितेंद्र सिंह सोढ़ी, प्रीतपाल सिंह अरोरा, वेद प्रकाश अग्रवाल, सुदामा गुप्ता, सुरेश चंद्र गुप्ता अध्यक्ष जनभागीदारी समिति, उमेश गुप्ता, राजेश गुप्ता प्राचार्य आत्मानंद विद्यालय बतौली एवं विष्णु गुप्ता मंचासीन थे। व्याख्यान माला का शुभारंभ सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के पूजा अर्चना के साथ हुआ। बी.ए. अंतिम वर्ष की छात्रा संध्या पोर्ते एवं सावित्री पैकरा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा अर्चना के पश्चात बी.ए. अंतिम वर्ष की छात्रा सावित्री कुजूर और संध्या पोर्ते ने राजकीय गीत प्रस्तुत किया। बी.ए. प्रथम वर्ष की छात्राएं स्नेहा पैकरा, खुशबू प्रजापति एवं अरुण एक्का ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर त्रिपाठी ने व्याख्यान माला में अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भाषा का ज्ञान विचार अभिव्यक्ति के लिए बहुत आवश्यक है। हिंदी जन सामान्य के बोलचाल के साथ राजकाज की भाषा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के इतने सालों के पश्चात भी हिंदी इतनी सक्षम नहीं है कि पूरे देश में राष्ट्रभाषा के रूप में प्रयुक्त किया जा सके। अहिंदी भाषी राज्यों में हिंदी के विकास के लिए प्रचार-प्रसार की अभी भी महती आवश्यकता है। व्याख्यामाला में अपना वक्तव्य देते हुए जितेंद्र सिंह सोढ़ी ने राजभाषा और राष्ट्रभाषा की व्याख्या करते हुए राष्ट्रभाषा के महत्व को निरूपित किया एवं हिंदी दिवस मनाया जाने की प्रासंगिकता पर अपना अभिमत रखा। कार्यक्रम को प्रीतपाल सिंह अरोड़ा, सुदामा गुप्ता, सुरेश गुप्ता एवं राजेश गुप्ता ने भी संबोधित किया।

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हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ने व्याख्यान माला का संचालन करते हुए हिंदी भाषा के क्रमिक विकास और हिंदी के वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। वक्ताओं एवं अतिथियों के प्रति आभार वाणिज्य विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. बलराम चंद्राकर ने किया। महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए हिंदी दिवस पर “आधुनिक भारत के नवनिर्माण में राष्ट्रभाषा हिंदी की भूमिका” एवं “भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विकास में राष्ट्रभाषा हिंदी का योगदान” शीर्षक पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसमें कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय के सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों ने सहभागिता करते हुए निबंध लिखा था।

व्याख्यान माला में महाविद्यालय के प्राचार्य बी.आर. भगत, जिवियन खेस, श्रीमती सुभागी भगत, सुश्री मधुलिका तिग्गा, सुमित्रा गिरी एवं जितेन्द्र कुमार दास सहित हिंदी साहित्य विकास परिषद के सदस्य, स्वीप के कैंपस एंबेसडर सर्वेश्वर प्रजापति एवं सुमत्री तिग्गा सहित कला, विज्ञान एवं वाणिज्य विभाग के विद्यार्थी गण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उक्ताशय की जानकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ने दिया।

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