अगर हम बटेंगे तो दुश्मन इसका फायदा उठाएंगे : आरपी सिंह

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने गुरुवार को आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की चर्चा करते हुए, उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की दिशा में उठाए गए कदमों, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। इसके अलावा, उन्होंने ब्रह्म सिंह तंवर के आम आदमी पार्टी में शामिल होने पर भी प्रतिक्रिया दी।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री के बयान पर आरपी सिंह ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि जब भी देश बंटा है, आक्रांताओं ने हमारे देश पर हमला किया है। चाहे वह दुर्रानी का आक्रमण हो या पानीपत का तीसरा युद्ध हो। हमारे अतीत में ऐसे कई उदाहरण हैं जब हम बंटे थे और इसका फायदा दुश्मनों ने उठाया था। पीएम मोदी का कहना बिलकुल सही है कि हम जब तक एक रहेंगे, तभी तक आगे बढ़ेंगे और सुरक्षित रहेंगे। अगर हमारे बीच कोई बंटवारा होगा, तो अन्य लोग इसका फायदा उठाएंगे।

आरपी सिंह ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब चुनाव होते हैं, तो पूरा प्रशासनिक सिस्टम रुक जाता है और इसमें बाधाएं आती हैं। यदि राज्य और देश के चुनाव एक साथ होंगे, तो प्रशासनिक गतिविधियां सुचारू रहेंगी। हर बार चुनाव में होने वाला खर्च, चाहे वह सरकार का हो या चुनाव आयोग का, उसे बचाया जा सकेगा। वह धन देश के अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में लगाया जा सकेगा।”

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दिल्ली में प्रदूषण और पटाखों पर प्रतिबंध लगाने पर उन्होंने कहा कि दीपावली हमारा एक त्योहार है, जिसमें हम खुशियां मनाते हैं। लेकिन दिल्ली सरकार ने पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। हमें यह समझना चाहिए कि दिल्ली में 48 प्रतिशत प्रदूषण यातायात से होता है, जबकि पटाखों से होने वाला प्रदूषण केवल 1 प्रतिशत है। सरकार को त्योहारों की परंपरा को ध्यान में रखते हुए इस पर कोई संतुलित निर्णय लेना चाहिए।

इसके अलावा, ब्रह्म सिंह तंवर के आम आदमी पार्टी में शामिल होने पर आरपी सिंह ने कहा कि चुनाव का मौसम आ गया है। इस समय लोग अपनी धाराएं बदलते हैं। यह कोई नई बात नहीं है। अच्छा होता कि वह हमारी पार्टी के साथ रहते, क्योंकि उनका पुराना साथ था। लेकिन चुनावी प्रक्रिया में इस तरह के बदलाव आम हैं।

–आईएएनएस

पीएसके/एफजेड

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