स्कूली स्तर से ही पढ़ाई में नैतिक शिक्षा के साथ देश की सभ्यता व संस्कृति की पढ़ाई अनिवार्य:गरिमा

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 2ता.बेतिया। नगर निगम की महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने कहा कि हमारे विद्यार्थियों में स्कूली स्तर से ही पठन पाठन में नैतिक शिक्षा के साथ देश की सभ्यता व संस्कृति की पढ़ाई अनिवार्य है। वे शुक्रवार को नगर राज ड्योढी स्थित सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में पश्चिम और पूर्वी चम्पारण में संचालित विद्या भारती के कुल 42 शिशु/विद्या मंदिरों के की प्रतियोगिता के प्रतिभागी कुल करीब आठ सौ विद्यार्थी और आचार्यगण उपस्थिति में समारोह का उद्घाटन दीप प्रज्वलित द्वारा करने के बाद बोल रहीं थीं। महापौर श्रीमती सिकारिया ने कहा कि हमारे समय में स्कूल स्तर से ही पठन पाठन में नैतिक शिक्षा के साथ देश की सभ्यता और संस्कृति की पढ़ाई अनिवार्य हुआ करती थी। बाद के पाठ्यक्रम में इसकी अनदेखी के कारण हमारी शिक्षा प्रणाली देश के स्वच्छ चरित्र के सशक्त नागरिक तैयार करने कमजोर साबित होती रही है। लेकिन नई शिक्षा नीति पर आधारित पाठ्यक्रमों में देश की विज्ञानपरक सभ्यता,संस्कृति के सम्यक ज्ञान का बेहतर समावेश होना स्वागत योग्य पहल है। महापौर ने इस प्रतियोगी प्रतिस्पर्द्धा में शामिल विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि प्रतियोगिता से प्रतिभा में निखार आता है। ऐसी प्रतियोगिता विद्यार्थियों में ज्ञान विज्ञान में गुणवत्तापूर्ण विकास का सशक्त माध्यम हो सकती है। वही स्थानीय प्रधानाचार्य सुशील कुमार ने विभाग स्तरीय इस प्रतियोगिता के आयोजन के लिए विद्या भारती और लोक शिक्षा समिति के अधिकारीगण का आभार व्यक्त करने के साथ सबका स्वागत किया। प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र में चम्पारण विभाग प्रमुख अनिल राम, सरस्वती विद्या मंदिर बरवत के प्रधानाचार्य, विद्यालय समिति प्रबंध समिति के सचिव रविरंजन यादव, कोषाध्यक्ष सुभाष रूंगटा आदि गणमान्य लोगों का विशेष योगदान रहा।

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