मणिपुर के राज्यपाल ने भारत-म्यांमार सीमा का किया दौरा, बाड़ लगाने के कार्य की समीक्षा की

इंफाल, 10 जनवरी (आईएएनएस)। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने शुक्रवार को भारत-म्यांमार सीमा स्थित मोरेह कस्बे का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) के समग्र कामकाज और सीमा बाड़ लगाने के काम का जायजा लिया।

भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण के अधिकारियों ने राज्यपाल को आईसीपी के कामकाज और भारत और म्यांमार के बीच व्यापार के बारे में जानकारी दी।

राजभवन के एक अधिकारी ने कहा कि राज्यपाल ने नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) के नेताओं के साथ बातचीत की और उनकी शिकायतों को समझा। अधिकारी ने कहा कि पूर्व केंद्रीय गृह सचिव भल्ला ने बॉर्डर ट्रेड चैंबर ऑफ कॉमर्स, तमिल संगम, मणिपुर मुस्लिम काउंसिल और गोरखा समाज सहित मोरेह शहर के विभिन्न व्यापारिक और सामुदायिक नेताओं से भी मुलाकात की और उनकी समस्याओं और चिंताओं को सुना।

विभिन्न सामुदायिक नेताओं ने कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से सभी सीमा पार व्यापारिक गतिविधियों के निलंबन के कारण उन्हें होने वाली कठिनाइयों पर जोर दिया।

राज्यपाल ने भारत-म्यांमार मैत्री द्वार का भी दौरा किया और फिर गोवाजांग गांव गए, जहां उन्हें सीमा सड़क कार्य बल (बीआरटीएफ) की 25 बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर ने भारत-म्यांमार सीमा पर चल रहे बाड़ लगाने के काम के बारे में जानकारी दी।

राज्यपाल ने सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों और स्थानीय कर्मचारियों को उपहार वितरित किए और उनका उत्साहवर्धन किया।

3 जनवरी को राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद भल्ला ने अपने पहले दौरे में 7 जनवरी को चुराचांदपुर और बिष्णुपुर जिलों का दौरा किया और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों के साथ बातचीत के दौरान नेताओं से शांति-निर्माण प्रयासों में प्रशासन के साथ मिलकर काम करने की अपील की।

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उन्होंने चुराचांदपुर और बिष्णुपुर जिलों में विभिन्न राहत शिविरों का भी दौरा किया और विस्थापित लोगों से बातचीत की, जो मई 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से राहत शिविरों में रह रहे हैं।

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने टेंग्नौपाल जिले के मोरेह शहर के पास भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेज कर दिया है। चार पूर्वोत्तर राज्य म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं, जिसमें से 398 किलोमीटर मणिपुर में है। हथियारों, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए जानी जाने वाली पूरी 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर 31,000 करोड़ रुपये की लागत से बाड़ लगाई जाएगी।

–आईएएनएस

पीएसके/सीबीटी

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