सोन नदी मे खनन प्रतिबंधित है, एनजीटी के आदेश का उल्लंघन.! अवमानना याचिका दाखिल की जाएगी.! विकास शाक्य 

अंधाधुन खनन.! प्राकृतिक संतुलन के लिए नदी को बचाना बहुत ही जरूरी है।
– पर्यावरण दिवस पर ग्रामीणों ने सोन नदी को बचाने का लिया संकल्प की पूजा पाठ।
ए के गुप्ता, मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 5ता.सोनभद्र – नमस्ते ब्रह्मपुत्राय, शोणभद्राय ते नमः मंत्रोउच्चारण और शंखनाद के बीच ग्रामीणों ने सोन नदी की पूजा अर्चना करके सोना नदी का जल उठा कर सोन नदी और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया साथ ही बिरसा मुंडा फाउंडेशन के सोन नदी बचाने के कानूनी पहल की भी ग्रामीणों ने सराहना की।
सोन नदी को ब्रम्हा जी के पुत्र होने की मान्यता और, वैदिक मान्यता के कारण सोन नदी पूज्य है साथ ही नदी पेड़ पौधे पहाड़ आदिवासियों के पूजनीय हैं ।हाल के दिनों में बालू खनन कर्ता सोन नदी के धारा को बांध कर अंधाधुंध खनन करके नदी के स्वरूप को बदलकर अस्तित्व ही समाप्त कर देने पर लगे हुए है, सोन नदी को बचाने के लिए बिरसा मुंडा फाउंडेशन ने एनजीटी खनन अधिवक्ता अभिषेक चौबे के जरिये याचिका दाखिल कर सोन घड़ियाल के रूप में सोन नदी को संरक्षित करने की आवाज उठाई  जिस पर माननीय न्यायालय बृहद निर्णय पारित करके याचिका स्वीकार कर सरकार को सोन नदी संरक्षित किए जाने के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था परंतु खनन कर्ता सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दिए और ग्रीष्म काल तक स्थगन प्राप्त कर पुनः खनन करने लगे.!
बिरसा मुंडा फाउंडेशन के इस लड़ाई को ग्रामीणों ने सराहना और स्थानीय ग्रामीणों ने विश्व पर्यावरण दिवस पर आज सुबह का स्नान सोन नदी में करके विधिवत विद्वान ब्राह्मणों द्वारा ” नमस्ते ब्रह्मपुत्राय, शोणभद्राय ते नमः” मंत्रोउच्चारण और शंखनाद  के साथ ब्रह्मा के पुत्र सोन नदी की पूजा स्तुति की तथा जल लेकर सोन नदी को बचाने का संकल्प लिया। बिरसा मुंडा फाउंडेशन की याचिका पर अदालत में कानूनी पक्ष रखने वाले उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने कहा कि जिस तरह से अंधाधुंध खनन हो रहा है उससे नदी के सतह कमजोर हो रहा है और भविष्य में नदी अपनी धारा बदलेगी तो चोपन के आसपास के रहाशयी लोगों के लिए खतरा बन जाएगा। सोन नदी का पौराणिक महत्व है और प्राकृतिक संतुलन के लिए नदी को बचाना जरूरी है जिसके लिए संघर्ष कर रहे हैं सोन नदी और पर्यावरण बचाने के लिए सभी लोगों को आगे आने की जरूरत है ।फाउंडेशन के विधिक सलाहकार विकाश शाक्य एडवोकेट ने बताया कि खनन कर्ता अपने लीज क्षेत्र से बढ़कर अवैध खनन कर रहे हैं तथा सोन नदी की धारा को बाधित कर रहे हैं। सोन नदी में खनन हो ही नही सकता इसीलिए एनजीटी ने सोन नदी मे खनन पर रोक लगाया है परन्तु ठठरा में मध्यप्रदेश के आंशिक सोन नदी क्षेत्र लीज लेकर लीज क्षेत्र से बाहर सोनभद्र के सोन नदी मे खनन कर रहे है जो प्रतिबंधित है यह कृत्य सीधे तौर पर एनजीटी के आदेश का उल्लंघन है जिसके बाबत अवमानना याचिका दाखिल की जाएगी।

Sonebhadra संचालकों व पासरो द्वारा अवैध वसूली को लेकर ओबरा एसडीएम के ऊपर आरोप.! बदनाम करने की साजिश.! एसडीएम 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *