उत्तरी क्षेत्र के विस्थापितों ने 7 मौजा को पंचायत में शामिल करने को लेकर दिया धरना 

मीडिया हाउस न्युज एजेंसी बोकारो : उत्तरी क्षेत्र के 6 प्रस्तावित पंचायत को पंचायती राज में शामिल करने और ग्रामीण रैयतो के नाम से लगान रशीद काटने को लेकर उपायुक्त कार्यालय समीप विस्थापितो ने विरोध प्रदर्शन कर धरना दिया। विस्थापित की माने तो शहीद प्रेम महतो की जो हत्या हुई थी उसके न्याय के लिए यहां के जो विस्थापित ग्रामीण जिसको पंचायत में रहना चाहिए था पुनर्वास का जमीन का रसीद कटना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया उसी के खिलाफ व्यापक रूप से आंदोलन है और चेतावनी है। उन्होंने कहा कि सेल जो केंद्र सरकार की सब्सिडी है और केंद्र सरकार की सीआइएसएफ है इनके खिलाफ आंदोलन होता है तो लाठी चार्ज किया जाता है यह केंद्र सरकार ने हत्या की है हमारा ही जमीन पर लाठी और गोली मारा जाता है हम लोगो की यह बड़ी लड़ाई है और इस लड़ाई में तमाम लोग संघर्ष के साथी हैं और आने वाले दिन में बीएसएल का पूरा चक्का जाम होगा। रैयतों ने कहा कि हम लोगों की 50 हजार की आबादी है 7 मौजा में 27 ग्राम टोला है उन्होंने उपायुक्त से आग्रह करते हुए कहा कि हमें पंचायत में शामिल किया जाए और हमारी भूमि का रसीद काटा जाए अन्यथा हम लोगों सुप्रीम कोर्ट जाने को बाध्य होंगे। एक दिवसीय धरना के माध्यम से विस्थापितों ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लगभग 60 वर्ष पूर्व 10 मिलियन टन चतुर्थ इस्पात कारखाना निर्माण हेतू बोकारो जिला में कुल 49 मौजा का भूमि अधिग्रहण किया गया जिसमें 29 मौजा में दखल लेकर चारदीवारी करने के उपरांत प्लांट निर्माण तथा सेक्टर को बसाया गया। इसमें से 13 मौजा को पंचायती राज में शामिल 2018 में ही कर लिया गया बाकि बचे 7 मौजा यथा कुण्डौरी, शिबुटांड, पंचौरा, महेशपुर, कन्फट्टा, वैधमारा तथा महुआर को छोड दिया गया। ये मौजा का न तो भूमि एवं न ही हाउस ब्लॉक का टेक ओवर हॅड ओवर हुआ ना ही पूर्ण मुआवजा, नियोजन तथा पुर्नवास हुआ। लोग जैसे थे वैसे ही अभी भी बसे है वर्तमान में लाखो की आबादी इन 7 मौजा में निवास करती है तथा खेती कर जीवन यापन करते है। इन गांवो के लोग विधायक-सांसद तो चुनते है लेकिन गांव की सरकार जिससे गांव का विकास हो सके उसका अधिकार से वंचित रखा गया है। जिला प्रसाशन द्वारा भौतिक निरिक्षण कर रिपोर्ट बनाया गया जिसमें 7 मौजा को मिलाकर कुल 6 प्रस्तावित पंचायत का जनसंख्या के आधार पर सीमांकण भी किया गया है परंतु अभी तक अधिसुचना एवं गजट प्रकाशित नही किया गया है। जिससे स्थानीय लोगो में काफी रोष है। उन्होंने कहा कि अगर हमारी उपरोक्त मांगो पर विचार नही हुई तो हम ग्रामीण रैयत उग्र आंदोलन करने को मजबुर होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रसाशन बोकारो की होगी।

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