यूसीसी का मुख्य उद्देश्य मुसलमानों को तकलीफ देना : मोहम्मद सईद नूरी

मुंबई, 29 जनवरी (आईएएनएस)। रजा अकादमी के सचिव मोहम्मद सईद नूरी ने बुधवार को आईएएनएस से बात करते हुए कई अहम मुद्दों पर अपनी राय दी। उन्होंने मंत्री नितेश राणे द्वारा बुर्का विवाद पर दिए गए बयानों पर टिप्पणी की। इसके अलावा, नूरी ने अन्य सांप्रदायिक और सामाजिक विषयों पर भी अपनी बात रखी।

नितेश राणे के बयान कि महिलाएं अगर वह बुर्का पहनना चाहती हैं, तो उन्हें घर तक ही सीमित रहना चाहिए। मोहम्मद सईद नूरी ने कहा कि नितेश राणे को इस तरह के बयानों से बचना चाहिए, जो केवल लोगों को बांटे। ऐसे बयान सिर्फ सुर्खियों में रहने के लिए दिए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर कोई लड़की बुर्का पहनकर स्कूल जाती है तो इससे क्या समस्या है? इस तरह के बयान सिर्फ लोगों को उलझाने और ध्यान आकर्षित करने के लिए होते हैं। सभी को अपने यूनिफॉर्म का पालन करना चाहिए और जब बच्चियां स्कूल या कॉलेज जाती हैं, तो वे यूनिफॉर्म में जाती हैं। यह स्कूलों के नियम हैं, जिन्हें सभी को मानना चाहिए।

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने के सवाल पर सईद नूरी ने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य सिर्फ मुसलमानों को तकलीफ देना है। हम इसका विरोध करेंगे और इसमें शामिल किसी भी प्रयास का विरोध जारी रखेंगे। महाराष्ट्र में भी अगर यूसीसी लागू किया गया तो हम इसका विरोध करेंगे।

वक्फ बिल संशोधन विधेयक पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि मुसलमानों को हमेशा इस तरह के कदमों से तकलीफ दी जाती है। वक्फ की जमीन मुसलमानों की संपत्ति है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। यह जमीन अच्छे कामों के लिए दी जाती है, इसमें सरकार का दखल समझ में नहीं आता। महाकुंभ और वक्फ जमीन के मामले पर भी स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह सब एक गलत प्रचार है। कोई भी व्यक्ति किसी भी जमीन को अवैध रूप से नहीं ले सकता। यह सब बेबुनियाद बातें फैलाई जा रही हैं।

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सिद्धिविनायक मंदिर के ड्रेस कोड पर उन्होंने कहा कि यह नियम सिर्फ मंदिर के भीतर लागू होते हैं। इस्लाम में भी अपने अनुयायियों के लिए खास दिशा-निर्देश होते हैं। हर धर्म और मंदिर को अपने नियम बनाने का अधिकार है और लोग उन नियमों का पालन करते हैं।

महाकुंभ में हुए भगदड़ की घटना पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे हादसों से बचने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाएं न हों।

–आईएएनएस

पीएसके/सीबीटी

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