उड़ता तीर’ मूवी रिव्यू: आयुष्मान खुराना की कॉमेडी और राहुल बोस की अदाकारी ने जमाया रंग

बॉलीवुड में जासूसी, देशभक्ति और कॉमेडी का तड़का लगाकर दर्शकों को हंसाने और रोमांचित करने की कोशिश नई नहीं है, लेकिन हर बार यह फॉर्मूला काम करे, जरूरी नहीं. आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ‘उड़ता तीर’ भी कुछ ऐसे ही मसाले लेकर आई है, जहां जासूसी मिशन है, पहचान का झोल है और कहानी में कॉमेडी का तड़का भी लगाया गया है. मगर सवाल यह है कि क्या फिल्म इन तमाम मसालों को मिलाकर मनोरंजन की चटपटी डिश परोस पाती है या फिर कहानी उलझकर रह जाती है?
बॉलीवुड में देशभक्ति और जासूसी पर कई फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन ‘उड़ता तीर’ इस मसाले में कॉमेडी का ऐसा तड़का लगाती है कि कहानी धीरे-धीरे हंसी के पटाखे फोड़ने लगती है. फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है इसका अलग अंदाज, जहां गलत पहचान, जासूसी और मजेदार हालात मिलकर दर्शकों को एंटरटेन करते हैं.
कहानी का कन्फ्यूजन ही है असली खेल
आयुष्मान खुराना फिल्म में विक्रांत के किरदार में हैं, जो खुद को भारतीय खुफिया एजेंसी CTS का अधिकारी समझता है. लेकिन असली ट्विस्ट यह है कि वह दरअसल पाकिस्तानी एजेंट बिलाल है, जिसकी याददाश्त एक हादसे के बाद चली जाती है. इसके बाद वह अपने ही लोगों के पीछे पड़ जाता है. यही पहचान का खेल फिल्म में कॉमेडी और सस्पेंस दोनों पैदा करता है.
फिल्म अपनी कहानी और किरदारों को जमाने में करीब आधा घंटा लेती है, इसलिए शुरुआत में थोड़े धैर्य की जरूरत पड़ती है. लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, मजेदार घटनाएं और एक के बाद एक ट्विस्ट माहौल बना देते हैं. इंटरवल के बाद शुरुआती हिस्सा थोड़ा सुस्त जरूर लगता है, मगर फिर फिल्म दोबारा रफ्तार पकड़ लेती है. फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो आपको सस्पेंस में छोड़े, बीच-बीच में आनेवाले छोटे-छोटे कॉमेडी पंच और जोक्स आपको हंसाने का भरपूर काम करते हैं.
आयुष्मान खुराना ने निभाया दमदार किरदार
आयुष्मान खुराना एक बार फिर लीक से हटकर किरदार में नजर आते हैं. दो अलग पहचानों के बीच फंसे शख्स की उलझन और उसके भोलेपन को उन्होंने अच्छे से निभाया है. उनकी अदाकारी फिल्म की कहानी को सहारा देती है और कॉमेडी वाले सीन में भी उनका अंदाज जंचता है.
फिल्म में राहुल बोस का अंदाज सबसे ज्यादा चौंकाता है. उन्हें इस तरह मजेदार किरदार में देखना दिलचस्प है और वह कई मौकों पर महफिल लूट ले जाते हैं. उनकी कॉमिक टाइमिंग फिल्म के मनोरंजन को बढ़ाती है और उनका किरदार लंबे समय तक याद रह सकता है.
दिवंगत मुकुल देव की मौजूदगी खास
दिवंगत एक्टर मुकुल देव भी फिल्म में अपनी छाप छोड़ते हैं. उनका काम कहानी को मजबूती देता है और पर्दे पर उनकी मौजूदगी खास महसूस होती है. उनकी आखिरी फिल्म के तौर पर ‘उड़ता तीर’ देखना भावुक भी कर सकता है, क्योंकि दर्शकों के लिए यह उनकी यादों से जुड़ा एक अहम पड़ाव है.
सुहैल नैय्यर को अच्छा रोल मिला है और वह इसका पूरा फायदा उठाते हैं. सारा अली खान और स्मिता तांबे अपने-अपने किरदारों में ठीक लगती हैं. वहीं राम कपूर, बृजेंद्र काला और गुलशन ग्रोवर भी कहानी में मनोरंजन का रंग भरते हैं. सपोर्टिंग कास्ट की वजह से कॉमेडी कई जगह और मजेदार बन जाती है.
फिल्म के गाने बहुत खास असर नहीं छोड़ते और औसत ही लगते हैं. इसके उलट बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के सस्पेंस और कॉमेडी को बेहतर बनाता है. सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग भी ठीक हैं, हालांकि कुछ जगह कहानी की रफ्तार और बेहतर हो सकती थी.
कॉमेडी के दीवानों के लिए मजेदार पैकेज
डायरेक्टर-राइटर आकाश ए कौशिक ने देशभक्ति, एक्शन, सस्पेंस और कॉमेडी को मिलाकर एक मनोरंजक फिल्म पेश की है. कुछ जगहों पर धीमी रफ्तार खटकती है, लेकिन दमदार ट्विस्ट, राहुल बोस की शानदार कॉमिक अदाकारी और आयुष्मान का अलग अंदाज इसकी भरपाई करते हैं. अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें गलत पहचान से पैदा हुआ कन्फ्यूजन और लगातार बदलते हालात हंसने का मौका दें, तो ‘उड़ता तीर’ एक बार देखी जा सकती है.










