तुष्टिकरण की ओट में लालू जी ने अपराध और आतंक को बढ़ावा दिया* : विजय कुमार सिन्हा

पटना मीडिया हाऊस 26ता.संवाददाता।* बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि श्रीमान लालू प्रसाद की पहचान भारतीय राजनीति में ‘पाखंड के पर्याय’ के रूप में रही है । वे कभी गरीबों का मसीहा बनने का स्वांग रचते हैं तो कभी मुसलमानों का शुभचिंतक बनने का नाटक करते हैं । लेकिन अपने पूरे राजनीतिक जीवन में अपने परिवार के अलावा किसी का भला नहीं कर पाए । कोई ऐसा सगा नहीं जिसे लालू जी ने ठगा नहीं हो । अपने राजनीतिक स्वार्थ को साधने के लिए उन्होंने हमेशा समाज को बांटने और लड़ाने का काम किया है । आर्थिक भ्रष्टाचार के मामले में तो इनका रुख जगजाहिर ही है । ताज्जुब की बात तो यह है कि राजद पोषित लोग आज लालू जी जैसे सजायाफ्ता के लिए भारतरत्न की मांग कर रहे । यह मांग करना भी भारतरत्न की प्रतिष्ठा का अपमान है । जबकि श्रीबाबू सहित कई महापुरुष बिहार में हुए हैं, जिनकी कीर्ति, वृत्ति और प्रवृति पर राज्य को गर्व है । उनके लिए इन्होंने कभी ऐसे सम्मान की मांग नहीं की ।

श्री सिन्हा ने कहा कि अब तो स्थिति ये हो गई है कि अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को पाने को कोशिश में वे और उनकी पार्टी देश की लोकतांत्रिक गरिमा और सामरिक संबंधों को भी तार-तार करने से बाज नहीं आ रहे । बीते दिनों संयुक्त अरब अमीरात(UAE) के राष्ट्राध्यक्ष के साथ भारत के माननीय प्रधानमंत्री की आधिकारिक बैठक की तस्वीर के साथ राजद के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से जिस प्रकार की टिप्पणी की गई भारत के लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वाले किसी भी दल उसकी अपेक्षा नहीं जा सकती । राजद ने प्रधानमंत्री के पद की गरिमा, भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा और राजनयिक संबंधों के प्रति सम्मान को एक साथ धूमिल करने का प्रयास किया है ।
श्री सिन्हा ने कहा कि तेजस्वी भी अपने पिता की तरह की भ्रम, विद्वेष और तुष्टिकरण की राजनीति के पोषक बन गए हैं । खुद को मुसलमानों का ‘स्वघोषित मसीहा’ मानने वाले श्रीमान लालू प्रसाद को जवाब देना चाहिए कि ‘माय’ समीकरण के सहारे 15 साल सत्ता में रहने के बावजूद कभी किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या अपनी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया । 1997 और 2015 में मौका मिला तब अपनी पत्नी और पुत्र को सत्ता सौंप दी । उस वक्त उन्होंने किसी मुसलमान को सत्ता की कमान क्यों नहीं दी ? करीब तीन दशकों से अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद बने बैठे हैं । क्या उन्हें अपनी पार्टी का कोई मुसलमान या अन्य नेता अध्यक्ष पद के काबिल नजर नहीं आता ? इन लोगों ने पार्टी में मुसलमानों को प्रतिनिधित्व देने के नाम पर आतंक, अपराध और अराजकता फैलाने वालों को प्रश्रय दिया है श्री सिन्हा ने कहा कि लालू परिवार ने मुसलमान ही नहीं स्वयं अपने स्वजातीय लोगों के साथ भी सौतेला व्यवहार किया है । उन्होंने अपने समाज के किसी भी जनाधार वाले नेता को आगे नहीं बढ़ने दिया । इसका साक्षात उदाहरण लोगों ने बीते लोकसभा चुनाव के दौरान देखा है । दरअसल लालू प्रसाद जी की राजनीति का एक ही मूलमंत्र है- ‘हमेशा राज करेगा मेरा बेटा और पोता’ । इसलिए उनके दल का सामाजिक न्याय अपने परिवार से शुरू होकर अपने परिवार तक ही सिमट कर रह गया है ।इसलिए आगामी उपचुनाव या झारखंड चुनाव में ये पिता-पुत्र जहां जाएंगे वो सीट ये लोग हार जाएंगे ।

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