UPPSC मे मानकीकरण व्यवस्था से क्यूँ नदारद है युवा.?

मीडिया हाउस न्यूज एजेन्सी लखनऊ-मानकीकरण की प्रक्रिया वैकल्पिक व्यवस्था के रूप मे आई है ना कि अनिवार्य व्यवस्था के रूप मे, इस बात को समझना होगा! SSC/Railway जैसे परीक्षाए जिसमे तुलनात्मक रूप से अभ्यर्थीयों की संख्या बहुत अधिक होती है और परीक्षा CBT यानी कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट के रूप मे होता है तो ऐसे मे संसाधनों की कमी के वजह से मानकीकरण की प्रक्रिया को अपनाया जाता है! मानकीकरण की प्रक्रिया कभी भी एक शिफ्ट मे हुए परीक्षा की बराबरी नहीं कर सकता! किसी भी बड़े से बड़े सांख्यिकी गणित के विद्वान से मानकीकरण के सूत्र पर इसकी खामिया पूछेंगे तो आप पाएंगे कि ये सूत्र समानता की बात को कहीं पीछे छोड़ देता है!
देश के सबसे बड़े ब्यूरोक्रेसी व बड़े संसाधनों से पूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश को आखिर क्यूँ जरूरत पड़ी मानकीकरण की? उत्तर प्रदेश मे प्रयाप्त संसाधन है, अगर शासन/आयोग चाहे तो पहले की ही भाँती एक दिन और एक शिफ्ट मे परीक्षा कराई जा सकती है ऐसे मे आयोग द्वारा मल्टीपल शिफ्ट मे परीक्षा कराये जाने ले जिद्द से युवा हैरान भी है और चिंतित भी! जहाँ तक आयोग द्वारा यह कहा जा रहा है कि पारदर्शी, सुचितापूर्ण व नक़लविहीन कराने के लिए यह व्यवस्था लायी जा रही तब युवा पूछ रहे है कि क्या आज के पहले पारदर्शी व नक़लविहीन नहीं हो रही थी परीक्षाए?
आयोग द्वारा तर्क दिए जा रहे कि आवश्यक परीक्षा केन्द्रो की कमी होने से हमें मल्टीपल शिफ्ट मे करानी पड़ रही तो इसके भी तो उपाय है, महाविद्यालयों, औद्योगिक संस्थान, तकनिकी संस्थानो, तकनिकी विश्वविद्यालयों व विश्वविद्यालयों मे परीक्षा केंद्र बनाकर आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती! ऐसे देश जहाँ वन नेशन वन इलेक्शन की बात की जा रही हो वही युवाओं द्वारा एक दिन व एक शिफ्ट मे परीक्षा कराने की मांग को क्यूँ नहीं मानना चाहिए! सरकार व आयोग को युवाओं के मुद्दों व सवालों पर विचार करके छात्रहित मे फैसला लेना चाहिए!







