कांग्रेस का दावा, मतदाता पहचान-पत्र को आधार से जोड़ने का चुनाव आयोग का 'इरादा' मतदाता सूची पर उसके संदेह की स्वीकृति है

नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को कहा कि वह चुनावी फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) या मतदाता पहचान पत्रों को उन लोगों के आधार नंबर से जोड़ने की तैयारी कर रहा है, जिन्होंने स्वेच्छा से इन्हें उपलब्ध कराया है।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “कांग्रेस पार्टी के संदिग्ध मतदाता सूचियों के आरोप को स्वीकार करते हुए, चुनाव आयोग आधार का उपयोग करके इसे साफ करना चाहता है।”

पार्टी के आठ सदस्यीय नेताओं और विशेषज्ञों के सशक्त कार्य समूह (ईगल) ने एक बयान में कहा, “कांग्रेस पार्टी किसी भी व्यक्ति को वोट देने के अधिकार से वंचित न करने के लिए सुरक्षा उपायों के साथ एक रचनात्मक समाधान का स्वागत करती है।”

आपको बता दें कि इस निकाय की स्थापना कांग्रेस द्वारा भारत में चुनावों की सतर्क निगरानी बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए की गई थी कि चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखे।

ईगल ने आगे कहा कि ईपीआईसी वोटर-आईडी नंबरों को आधार नंबरों से जोड़ने का ईसीआई का फैसला “कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा हमारे मतदाता सूचियों की संदिग्ध प्रकृति के बारे में लगाए गए आरोप की स्पष्ट स्वीकृति है, जैसा कि हाल ही में महाराष्ट्र 2024 विधानसभा चुनावों में देखा गया था।”

कांग्रेस के ईगल ने कहा, “हम चुनाव आयोग से मांग करते हैं कि वह महाराष्ट्र के 2024 विधानसभा और लोकसभा चुनावों की पूरी मतदाता सूची सार्वजनिक करे। कांग्रेस पार्टी का मुख्य आरोप यह है कि महाराष्ट्र के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच सिर्फ पांच महीनों में नए मतदाताओं के नामांकन में असामान्य वृद्धि हुई है, जिसका मतलब है कि या तो ये नकली, डुप्लीकेट या भूत मतदाता थे।”

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इसमें आगे कहा गया है कि फर्जी या डुप्लीकेट मतदाता एक व्यक्ति के पास कई मतदाता पहचान-पत्र होने की समस्या है।

“चुनाव आयोग ने कांग्रेस पार्टी द्वारा उठाए गए ‘एक व्यक्ति के कई मतदाता पहचान-पत्र’ की इस समस्या को स्वीकार किया है, जिसे आधार का उपयोग करके डी-डुप्लीकेशन के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है।”

बयान में कहा गया कि कांग्रेस पार्टी ऐसे रचनात्मक समाधानों का समर्थन करती है, जो स्वच्छ मतदाता सूचियों को सुनिश्चित करें, जो कि 1949 में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा दिए गए इस कथन के अनुरूप है कि ‘लोकतंत्र में मतदाता सूचियां सबसे मौलिक हैं और चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है।’

पार्टी ने आगे कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि आधार लिंकेज के कारण किसी भी वयस्क भारतीय नागरिक को वोट देने के अधिकार से वंचित न किया जाए।

बयान में कहा गया, “कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग से सभी राजनीतिक दलों और हितधारकों से परामर्श करने और उन्हें आश्वस्त करने का आग्रह करती है कि एक भी पात्र नागरिक को वोट देने के अधिकार से वंचित न करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय हैं और साथ ही इस प्रक्रिया के माध्यम से किसी भी मतदाता की गोपनीयता का उल्लंघन नहीं किया जाता है।”

–आईएएनएस

एकेएस/सीबीटी

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