उत्तराखंड : गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे के लिए अनिल बलूनी ने पीएम मोदी को दिया धन्यवाद

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। मोदी सरकार ने बुधवार को केदारनाथ में गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। इससे यात्रा का समय बचेगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। केंद्र सरकार के इस फैसले का भाजपा नेता और लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने स्वागत किया है।

अनिल बलूनी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने केदारनाथ में गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक दो रोपवे की घोषणा की। इससे यात्रा आसान होगी, पर्यावरण के अनुकूल भी होगी, तीर्थयात्रा बढ़ेगी, उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। पूरे भारत के लोगों की इच्छा है कि वे केदारनाथ मंदिर में आशीर्वाद लें, अब यह आसान और सुरक्षित होगा। बड़ी संख्या में लोग दर्शन करेंगे। इन रोपवे से सिख भी हेमकुंड साहिब के दर्शन आसानी से कर सकेंगे।”

फिलहाल, सोनभद्र से केदारनाथ जाने में आठ-नौ घंटे का समय लगता है, लेकिन रोपवे बनने के बाद यहां पहुंचने में सिर्फ 36 मिनट लगेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने उत्तराखंड में 6,811 करोड़ रुपये की दो रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। पर्वतमाला परियोजना के तहत इनका निर्माण कराया जाएगा। रोपवे के निर्माण के बाद केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जाना आसान हो जाएगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक के बाद बताया कि सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 12.9 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मोड पर किया जाएगा, जिसकी कुल लागत 4,081.28 करोड़ रुपये होगी। रोपवे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी में विकसित करने की योजना है और यह सबसे उन्नत ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला (3एस) तकनीक पर आधारित होगा, जिसमें प्रति घंटे प्रति दिशा (पीपीएचपीडी) 1,800 यात्रियों को ले जाने की क्षमता होगी। रोजाना 18 हजार यात्रियों को ले जाया जा सकेगा।

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उल्लेखनीय है कि केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा गौरीकुंड से 16 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है और वर्तमान में इसे पैदल या टट्टू, पालकी और हेलीकॉप्टर द्वारा पूरा किया जाता है। प्रस्तावित रोपवे की योजना मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा प्रदान करने और सोनप्रयाग तथा केदारनाथ के बीच सभी मौसम में संपर्क सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

–आईएएनएस

पीएसके/एकेजे

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