लोकभवन में अत्याधुनिक 87 इंटरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी
लोकभवन में अत्याधुनिक 87 इंटरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
वीर पुलिसकर्मियों का सम्मान और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया सीएम ने
बंद कमरे में टिप्पणी करना आसान, सुरक्षा हटा दें तो बड़े से बड़े व्यक्ति को भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगती: मुख्यमंत्री
सीएम ने कहा- पुलिस रिफॉर्म लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश, सात पुलिस कमिश्नरेट कर रहे काम
14 लाख से अधिक कैमरों से अपराध पर निगरानी, घटनाओं के खुलासे के साथ रोकथाम में भी मिल रही मदद
यूपी पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र, वीरगति को प्राप्त इंस्पेक्टर सुनील कुमार के परिवार का सम्मान
16 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक, 10 को मुख्यमंत्री वीरता पदक
लखनऊ,
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था। समानांतर सरकारें चलती थीं। माफिया के सामने नाक रगड़ी जाती थी, घुटने टेके जाते थे और पुलिस मजबूर थी। राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो वह कानून-व्यवस्था को सीधा कैसे कर सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लोकभवन सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई, वीर पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान किए और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया। प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की वकालत की थी, उसे उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे पहले लागू किया। प्रदेश में अब सात पुलिस कमिश्नरेट काम कर रहे हैं। आज यूपी पुलिस के सामने विचार, वीरता और तकनीक, तीनों का समन्वय दिखाई दे रहा है। ‘संघर्ष’ के माध्यम से पुलिस सेवा के अनुभव और चुनौतियां सामने आई हैं तो जांबाजों की वीरता का सम्मान हुआ है और सड़क सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहन पुलिस बल को समर्पित किए गए हैं।
बंद कमरे में बैठकर टिप्पणी करना बेहद आसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी। स्वस्थ चिंतन तभी संभव है, जब समाज में सुरक्षा का वातावरण हो। सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। यूपी पुलिस की थीम ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ इसी भावना को व्यक्त करती है। जब तराई क्षेत्र आतंकवाद की चपेट में था, तब पुलिस व सेना की सुरक्षा में ही आवागमन संभव था। सूर्यास्त के बाद आवाजाही लगभग बंद हो जाती थी। उस समय डीजीपी के रूप में प्रकाश सिंह ने इन चुनौतियों का सामना किया। पुलिस सुधारों के लिए प्रकाश सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। उत्तर प्रदेश ने पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
विचार तभी सार्थक, जब व्यवहार में उतरें
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैचारिकी केवल शब्द या आलेख नहीं होती, बल्कि वह व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों को भी समाहित करती है। प्रकाश सिंह ने अपने सेवाकाल में पग-पग पर इन चुनौतियों का सामना किया और अपनी पूरी सेवा को कुशलतापूर्वक पूरा किया। लंबे समय तक विभिन्न संस्थानों में व्याख्यानों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाली उनकी वैचारिकी अब पुस्तक के रूप में सामने आई है। आचार और विचार में जब समन्वय होता है और दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी परिणाम सामने आता है।
2017 से पहले कानून-व्यवस्था थी बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ‘यूपी वाला’ कहकर लोगों को बाहर कर दिया जाता था। पुलिस के सामने भी बड़ी चुनौतियां थीं। राजनीतिक नेतृत्व में स्वयं निर्णय लेने की सामर्थ्य नहीं हो तो कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करना कठिन होता है। तब पुलिस सुधार और अवस्थापना सुविधाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं थी। एक वर्ष में करीब छह हजार पुलिस कार्मिकों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता था। पुलिसकर्मियों को टूटे भवनों में रहना पड़ता था। पीएसी की वाहिनियां समाप्त कर दी गई थीं। कोसीकलां, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई स्थानों पर दंगों के चलते लंबे समय तक कर्फ्यू लगा। इन्हीं परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश को बीमारू कहा जाने लगा। अर्थव्यवस्था, रोजगार, तकनीक और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन सहित विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियां खड़ी थीं। 2017 के बाद इन परिस्थितियों को बदलते हुए प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम किया गया।
तकनीक बनी आधुनिक पुलिसिंग का आधार
सीएम योगी ने कहा कि पुलिस सुधारों के साथ तकनीक का समावेश भी आवश्यक है। सेफ सिटी के लक्ष्य के तहत प्रदेश के शहरों में 14 लाख से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे घटनाओं की रोकथाम और उनके अनावरण में भूमिका निभा रहे हैं। जिलों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। विचार और व्यवहार के साथ जब तकनीक जुड़ती है तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं। आज यूपी पुलिस की पहचान में यह बदलाव दिखाई देता है।
सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एसटीएफ से जुड़े जांबाज इंस्पेक्टर स्वर्गीय सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उनकी वीरता के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया है और यूपी पुलिस को पहली बार यह गौरव प्राप्त हुआ है। सुनील कुमार सिंह ने 22 जनवरी, 2025 को आमने-सामने की मुठभेड़ में चार दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया था। इस दौरान वह अपराधियों की गोलियों से गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनका बलिदान हुआ। मुख्यमंत्री ने उनकी धर्मपत्नी एवं परिवार के सदस्यों को सम्मानित करते हुए उनकी स्मृति को नमन किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में 16 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार तथा 10 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी वीर पुलिसकर्मियों को बधाई दी।
सड़क सुरक्षा के लिए 87 इंटरसेप्टर वाहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रदेश के सामने बड़ी चुनौती है। कोविड के ढाई-तीन वर्षों में प्रदेश में लगभग 24 हजार लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में हर वर्ष 23-24 हजार लोगों की जान चली जाती है। इसे तकनीक और प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित 87 इंटरसेप्टर वाहनों को उत्तर प्रदेश पुलिस को समर्पित किया गया है। सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन केवल एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका प्रभाव पूरे परिवार और अंततः समाज पर पड़ता है। ये इंटरसेप्टर वाहन विभिन्न जनपदों में सड़क सुरक्षा के मानकों के अनुपालन और यातायात नियमों के प्रभावी प्रवर्तन में योगदान देंगे।
इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह, उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, स्वामी धर्मबंधु, प्रभात प्रकाशन से पवन अग्रवाल और उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीगण, कार्मिकगण व उनके परिजन उपस्थित रहे।










