साइबर अपराध-फर्जी कॉल और एसएमएस घोटाले, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल लॉन्च किया है।

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी नई दिल्ली-कार्यकारी नियमों के अनुसार साइबर अपराध से संबंधित मामले गृह मंत्रालय के अधीन हैं। दूरसंचार विभाग साइबर धोखाधड़ी के लिए दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने का प्रयास करता है। इसके अतिरिक्त भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के लिए एक ढांचा और इको-सिस्टम प्रदान करने हेतु एक संबद्ध कार्यालय के रूप में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (14सी) की स्थापना की है। गृह मंत्रालय ने जनता को सभी प्रकार के साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने में सक्षम बनाने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल- एनसीआरपी(https://cybercrime.gov.in) भी लॉन्च किया है। 14सी के अनुसार, 2024 में एनसीआरपी पर शिकायतों और खोई गई राशि की कुल संख्या क्रमशः 19.18 लाख और 22811.95 करोड़ थी। इसके अतिरिक्त, दूरसंचार विभाग और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी ने भारतीय मोबाइल नंबरों वाले आने वाले अंतर्राष्ट्रीय स्पूफ कॉल्स की पहचान करने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए एक प्रणाली तैयार की है। ये कॉल भारत के भीतर से आती हुई प्रतीत होती हैं, लेकिन कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी (सीएलआई) को स्पूफ करके विदेश से साइबर अपराधियों द्वारा की जा रही थीं। इसके अतिरिक्त नकली दस्तावेजों का उपयोग करके सिम लेने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए, दूरसंचार विभाग ने एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग नामों से लिए गए सिम की पहचान करने के लिए एक स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और बिग डेटा एनालिटिक टूल एएसटीआर बनाया है।

दूरसंचार विभाग दूरसंचार संबंधी धोखाधड़ी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और नवीनतम दूरसंचार सुरक्षा उपायों से अपडेट रहने के लिए नागरिकों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करता है। संदिग्ध धोखाधड़ी वाले संचार की रिपोर्ट करने के लिए दूरसंचार विभाग की नागरिक केंद्रित पहल, संचार साथी ऐप/पोर्टल के उपयोग को प्रोत्साहित करने के भी प्रयास किए गए हैं। राज्य-विशिष्ट ब्रीफिंग और स्थानीय भाषाओं में सामग्री के प्रसार, सोशल मीडिया अभियानों, नियमित प्रेस विज्ञप्तियों, एसएमएस अभियानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए)/बैंकों/दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) आदि जैसे कई हितधारकों के साथ सहयोग के माध्यम से नागरिकों के साथ जुड़ाव और जागरूकता के प्रयास भी किए गए हैं। इसके अलावा, दूरसंचार विभाग के संचार मित्र स्वयंसेवक कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र स्वयंसेवक नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और संचार साथी के बारे में शिक्षित करने के लिए सक्रिय रूप से उनसे जुड़ रहे हैं। वे अपने मोबाइल कनेक्शन को सुरक्षित रखने और धोखाधड़ी की रिपोर्ट करने के बारे में जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं और जनता के साथ जमीनी स्तर पर सहयोग कर रहे हैं।

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इसके अतिरिक्त दूरसंचार विभाग द्वारा उठाए गए कदमों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. दूरसंचार विभाग ने साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए हितधारकों के बीच दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग से संबंधित जानकारी साझा करने हेतु एक ऑनलाइन सुरक्षित डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) विकसित किया है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पुलिस, 14सी वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन), बैंकों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं आदि सहित लगभग 620 संगठनों को डीआईपी में शामिल किया गया है।

2. दूरसंचार विभाग ने वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (एफआरआई) विकसित किया है, जो एक जोखिम-आधारित मीट्रिक है, जो किसी मोबाइल नंबर को वित्तीय धोखाधड़ी के मध्यम, उच्च या अत्यंत उच्च जोखिम वाले के रूप में वर्गीकृत करता है। एफआरआई हितधारकों – विशेष रूप से बैंकों, एनबीएफसी और यूपीआई सेवा प्रदाताओं को किसी मोबाइल नंबर के उच्च जोखिम की स्थिति में प्रवर्तन को प्राथमिकता देने और अतिरिक्त ग्राहक सुरक्षा उपाय करने का अधिकार देता है। संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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