उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने ‘सी.बी. गुप्ता नेशनल श्री सम्मान’ और ‘मानद शिक्षक उत्कृष्टता पुरस्कार’ प्रदान किए

Media House लखनऊ- वर्तमान समय में शिक्षकों को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरणा लेकर गुरु की संकल्पना को आत्मसात करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही सच्चा मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तहत शिक्षा को रोजगार के साथ-साथ तकनीकी, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ा जाना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए व्यवसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उक्त बातें प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने लखनऊ के नेशनल पी.जी. कॉलेज में ‘सी.बी. गुप्ता नेशनल श्री सम्मान’ एवं ‘मानद शिक्षक उत्कृष्टता पुरस्कार’ के आयोजन में कहीं ।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में जंतु विज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार को तृतीय ‘सी.बी. गुप्ता नेशनल श्री सम्मान’ से सम्मानित किया तथा महाविद्यालय के नौ अन्य शिक्षकों को ‘मानद शिक्षक उत्कृष्टता पुरस्कार’ प्रदान किए। सम्मानित होने वालों में प्रो. रामकृष्ण, प्रो. पी.के. सिंह, प्रो. ज्योति भार्गव, प्रो. राकेश पाठक, डॉ. अपर्णा सिंह, डॉ. भानु प्रताप सिंह, डॉ. इंदुबाला, डॉ. रीना श्रीवास्तव और डॉ. शालिनी लांबा शामिल रहे।

इस अवसर पर मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि विवेकानंद जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा वह है जो नैतिकता सिखाए, ज्ञान-विज्ञान से अवगत कराए और स्वावलंबी बनाए। मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में इन विचारों की अत्यधिक प्रासंगिकता है और शिक्षक वर्ग को इन्हें व्यवहार में लाना चाहिए।शिक्षक सम्मान समारोह के दौरान कम्प्यूटर विज्ञान विभाग की शिक्षिकाओं डॉ. शालिनी, डॉ. गौरवी और महेश द्वारा लिखित पुस्तक “कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नैतिकता: नवाचार और उत्तरदायित्व का संतुलन” का विमोचन भी उच्च शिक्षा मंत्री ने किया।

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