सुखद और अवसादमुक्त जीवन के लिए ध्यान जरूरी : उपासिका पटावरी

मीडिया हाउस न्युज एजेंसी बोकारो : अंतर्मन की यात्रा करना ध्यान है। मन को साधना बहुत आवश्यक होता है, क्योंकि यह मन ही मनुष्य के कर्मबंध का कारण एवं मोक्ष का भी कारण हो सकता है। मन वचन काया की प्रवृत्ति का निरोध करना और एक बिंदु पर एकाग्र होना ही ध्यान है। और, वास्तव में सुखद तथा अवसादमुक्त जीवन के लिए ध्यान करना बहुत ही जरूरी है। उक्त बातें जैन उपासिका संगीताजी पटावरी ने कहीं। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चास-बोकारो के तत्वावधान में चास के पुराना कुलदीप टॉकीज कॉम्प्लेक्स स्थित माणकचंद छल्लाणी निवास स्थान में मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के सातवें दिन मंगलवार को ध्यान दिवस के कार्यक्रम को वे संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आज की भागमभाग भरी जिंदगी और भौतिकतावादी युग में लोगों को सही नींद नसीब नहीं होती। जबकि 5-6 घण्टे नींद बेहद जरूरी है। इससे तन और मन दोनों ऊर्जावान बना रहता है। इसके लिए ध्यान करना आवश्यक है। खासकर, महिलाओं को अधिक अवसाद हो जाता है। अच्छी नींद के लिए महाप्राण ध्वनि, योगासन, कायोत्सर्ग आदि कारगर है। अच्छी नींद के लिए खान- पान भी सही हो और सूर्य अस्त से पहले हो।
अंतर-जगत को जानने का एकमात्र साधन है ध्यान : उपासिका कोठारी
इस अवसर पर उपासिका सायर जी कोठारी ने कहा कि ध्यान अंतर जगत को जानने का एकमात्र साधन है। 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने अपनी साधना काल के साढ़े 12 वर्ष में अधिकतम समय ध्यान में ही व्यतीत किया। तेरापंथ धर्म संघ की दशवें आचार्य महाप्रज्ञ जी ने ध्यान को एक नया रूप दिया जो प्रेक्षा ध्यान के रूप में माना गया। आज देश-विदेश के लोग इसे अपनाकर अपने जीवन को एक नया मोड़ दे रहे हैं। व्यक्ति त्याग तपस्या के द्वारा अपने इंद्रिय मन और चित्त को संयमित करते हुए अपनी आत्मा के निकट जाने का प्रयास करता है। आत्मा के निकट जाने के लिए व्यक्ति के द्वारा गृहीत किए हुए व्रत, जप और ध्यान उसे परमात्मा में लीन होने का मार्ग अग्रसर करता है। ऐसी ही कला को सिखाता है ध्यान दिवस। श्रावक समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व का सातवां दिन ध्यान दिवस निष्पत्ति एवं उपसंहार के रूप में है। साधु-साध्वी या कोई साधक भी ध्यान रूपी जड़ी-बूटी के बिना खड़ा नहीं रह सकता है। शरीर अलग है। आत्मा अलग है। इस भिन्नता को समझ कर ही अंतर्मन की यात्रा करना ध्यान है।










