'मोटर डिले' और मांसपेशियों की कमजोरी : बच्चों में जेनेटिक परीक्षण के संकेत

न्यूयॉर्क, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। बच्चों को चलने-फिरने में देरी हो या उनका शरीर कमजोर हो, तो ये संकेत हो सकता है कि उनके शरीर में कोई आनुवंशिक समस्या है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि न्यूरो डेवलपमेंट विकार वाले बच्चों में मोटर डिले और कम मांसपेशी टोन होना आनुवंशिक निदान के सामान्य संकेत हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-लॉस एंजिल्स (यूसीएलए) के शोधकर्ताओं यह पता लगाना चाहते थे कि इस समूह के बच्चों में कौन सी वजह से आनुवंशिक जांच करानी चाहिए।

डॉ. जूलियन मार्टिनेज, यूसीएलए हेल्थ के मेडिकल जेनेटिस्ट ने कहा कि जेनेटिक टेस्टिंग से डायग्नोसिस में मदद मिल सकती है, लेकिन हमें यह पता नहीं है कि कौन से शुरुआती न्यूरो-डेवलपमेंट लक्षण किसी को जेनेटिक टेस्टिंग के लिए योग्य बनाते हैं।

शुरुआती न्यूरो डेवलपमेंट लक्षणों को जानना मरीज के परिवार और डॉक्टर दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

मरीज का परिवार डॉक्टर से जेनेटिक टेस्ट कराने का अनुरोध कर सकता है। जेनेटिक टेस्ट से पता चल सकता है कि बच्चे को कोई जेनेटिक बीमारी है या नहीं। इससे अन्य स्वास्थ्य समस्याओं पर नज़र रखने में मदद मिल सकती है, या अगर कोई उपचार उपलब्ध है तो उस बीमारी के लिए इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।

जेनेटिक्स इन मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में 2014-2019 के दौरान यूसीएलए केयर एंड रिसर्च इन न्यूरो जेनेटिक्स क्लिनिक में देखे गए 316 रोगियों के मेडिकल चार्ट की समीक्षा की गई।

मरीजों को उनके जेनेटिक टेस्टिंग रिजल्ट के आधार पर वर्गीकृत किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन रोगियों में आनुवांशिक समस्या की पहचान हुई, उनमें से ज्यादातर महिलाएं थीं और उन्हें शुरुआती उपचार मिला। ये उपचार उनके मोटर विकास में देरी, कमजोर मांसपेशियों, या जन्मजात हृदय रोग जैसी समस्याओं के लिए किया गया था।

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अगर आनुवांशिक समस्या का जल्दी पता चल जाए, तो जन्मजात हृदय रोग, मानसिक बीमारी या दौरे पड़ने जैसी संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है।

–आईएएनएस

एससीएच/एएस

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