आत्मशोधन का सशक्त माध्यम है पर्युषण महापर्व : उपासिका सायरजी कोठारी

खाद्य संयम दिवस के साथ चास में जैन धर्मावलंबियों का नौदिवसीय कार्यक्रम शुरू
मीडिया हाउस न्युज एजेंसी बोकारो : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चास-बोकारो के तत्वावधान में इस वर्ष भी चास के पुराना कुलदीप टॉकीज कॉम्प्लेक्स स्थित माणकचंद छल्लाणी निवास स्थान में वार्षिक साधना व तप का नौ दिवसीय महापर्व पर्युषण बुधवार को शुरू हुआ। इस बार गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमणजी की महती कृपा से चास बोकारो मे पर्युषण महापर्व के शुभ अवसर पर धर्म का अलख जगाने हेतु गुरु-आज्ञा से उपासिका सुश्री सायर जी कोठारी एवं श्रीमती संगीता जी पटावरी का आगमन हुआ है। 20 से 27 अगस्त तक आयोजित इस कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे प्रवचन, संध्या प्रतिक्रमण 6.30 बजे से तथा रात्रि में 8.30 से 9.30 बजे तक प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है। इस कड़ी की शुरुआत खाद्य संयम दिवस के साथ हुई। इस अवसर पर उपासिका सुश्री सायरजी कोठारी ने पर्युषण महापर्व को आत्मशोधन का सशक्त माध्यम बताते हुए जीवन में संयम की महत्ता रेखांकित की। उपासिकाद्वय ने पर्युषण पर्व की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान महावीर ने चातुर्मास के 50 दिन बीतने पर और 70 दिन बाकी रहने पर पर्युषण पर्व की आराधना की थी। ऐसा संभवायांग में उल्लेख है। जैन उपासिकाओं ने पर्युषण आराधना की प्रत्येक नौ साधना पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिदिन तीन सामायिक, एक-दो घंटा मौन, एक घंटा स्वाध्याय, नौ द्रव्यों से अधिक खाने का त्याग, ब्रह्मचर्य के पालन, सचित्त और जमीकंद खाने का त्याग, जप, ध्यान करने, रात्रि भोजन के परिहार आदि के बारे में प्रकाश डाला। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि जैसे बलवान पर धावा बोलने के लिए बल का संचय आवश्यक है, उसी प्रकार रागादि शत्रुओं के घात के लिए सात दिन आध्यात्मिक बल संग्रह को समझना चाहिए। यह पर्व मात्र जैन संस्कृति का ही नहीं, मानव संस्कृति का पर्व है। श्रावक को अपने जीवन में खाद्य और अन्य भोगोपभोग विषयक प्रवृत्तियों में मर्यादा निश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संयम से ही जीवन अनुशासित होता है। पर्युषण पर्व के दौरान 20 अगस्त को खाद्य संयम दिवस के उपरांत 21 अगस्त को स्वाध्याय दिवस, 22 को सामायिक दिवस, 23 अगस्त को वाणी संयम दिवस, 24 अगस्त को अनुव्रत चेतना दिवस, 25 अगस्त को जप दिवस, 26 अगस्त को ध्यान दिवस, 27 अगस्त को संवत्सरी महापर्व तथा 28 अगस्त को क्षमापना दिवस के साथ इस नौदिवसीय पर्व का समापन होगा। तेरापंथ समाज की तरफ से उक्त जानकारी देते हुए मीडिया प्रमुख सुरेश बोथरा ने बताया कि पर्युषण पर्व पर प्रवचन-कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से माणिकचंद छल्लाणी, जयचन्द, राजेश कोठारी, अरिहन्त जैन, सुशील बैद, कनक जैन, सरिता कोठारी, अलका जैन, नीतू बोथरा, सती बोथरा, सुनीता कोठारी, गजराज बागवानी, शांतिलाल आदि लगे हैं। बुधवार को सायंकाल में प्रतिक्रमण, तत्पश्चात अर्हत वंदना, जिज्ञासा समाधान एवं परिचय का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।










