खनन न्यूज़-अवैध खनन अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव नहीं है, खनन और स्टोन क्रशर से भारी प्रदूषण-हाईकोर्ट

सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में कोई खनन गतिविधि नहीं होगी।

सोनभद्र-राज्य मंत्री के रहते हुए भी प्रदूषण की गंभीर स्थिति.! सख्त निर्देश-प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर सख्त कार्रवाई की जाये-राज्य मंत्री डॉ अरुण कुमार

Media House रांची-झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के इचक क्षेत्र में अवैध पत्थर खनन और गैरकानूनी स्टोन क्रशर यूनिट्स के संचालन को स्थापित मानते हुए राज्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रशासन अब “संस्थागत तैयारी की कमी” का हवाला देकर पर्यावरणीय नुकसान पर कार्रवाई से बच नहीं सकता। चीफ़ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ सिवाने नदी क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बिना पर्यावरणीय मंजूरी और आवश्यक लाइसेंस के चल रहे खनन और स्टोन क्रशर यूनिट्स से भारी प्रदूषण फैल रहा है, जिससे कृषि भूमि, नदी पारिस्थितिकी, फसलें और स्थानीय निवासी प्रभावित हो रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने वर्षों से अवैध खनन की समस्या स्वीकार की, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव नहीं है और कानून लागू करने वाली एजेंसियां केवल “कागजी आश्वासनों” तक सीमित रही हैं। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को खनन और स्टोन क्रशर यूनिट्स की सभी अनुमतियों की समीक्षा करने, अनुपालन सत्यापन तक संचालन रोकने, CCTV और GPS निगरानी लागू करने तथा पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि हजारीबाग वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में कोई खनन गतिविधि नहीं होगी।

अन्तर सदन बास्केटबॉल प्रतियोगिता में जल सदन बना विजेता।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *