पीएम मोदी की थाइलैंड यात्रा : 18वीं सदी की रामायण के भित्ति चित्रों पर आधारित एक विशेष डाक टिकट जारी

बैंकॉक, 3 अप्रैल, (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मोदी की थाईलैंड यात्रा के उपलक्ष्य में एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया है। यह डाक टिकट 18वीं सदी की रामायण के भित्ति चित्रों पर आधारित है।

पीएम मोदी ने कहा, मैं थाईलैंड सरकार का आभारी हूं कि मेरी यात्रा के उपलक्ष्य में 18वी शताब्दी की ‘रामायण’ भित्ति चित्रों पर आधारित एक विशेष डाक-टिकट जारी किया गया।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बैंकॉक पहुंचने पर रामायण के थाई संस्करण ‘रामकियेन’ को देखा। ‘रामकियेन’ भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘एक अद्वितीय सांस्कृतिक जुड़ाव! थाई रामायण, रामकियेन का एक आकर्षक प्रदर्शन देखा। यह वास्तव में समृद्ध अनुभव था जिसने भारत और थाईलैंड के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।’ उन्होंने लिखा, “रामायण एशिया के इतने सारे हिस्सों में दिलों और परंपराओं को जोड़ता है।”

द्विपक्षीय चर्चा के बाद थाई प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा ने पीएम मोदी को एक बेहद खास गिफ्ट दिया। उन्होंने पीएम मोदी को पवित्र ग्रंथ ‘द वर्ल्ड तिपिटका : सज्जया फोनेटिक एडिशन’ भेंट किया।

तिपिटका (पाली में) या त्रिपिटक (संस्कृत में) भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का एक प्रतिष्ठित संकलन है, जिसमें 108 खंड हैं और इसे प्रमुख बौद्ध धर्मग्रंथ माना जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी को भेंट किया गया संस्करण पाली और थाई लिपियों में लिखा गया है, जो नौ मिलियन से अधिक अक्षरों का सटीक उच्चारण सुनिश्चित करता है।

यह विशेष संस्करण 2016 में थाई सरकार ने ‘विश्व तिपिटका परियोजना’ के हिस्से के रूप में राजा भूमिबोल अदुल्यादेज (राम IX) और रानी सिरीकित के 70 साल के शासनकाल की स्मृति में प्रकाशित किया था।

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पीएम मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री शिनावात्रा ने मुझे त्रिपिटक भेंट किया और मैंने भगवान बुद्ध की भूमि भारत की ओर से हाथ जोड़कर इसे स्वीकार किया। पिछले वर्ष भारत ने भगवान बुद्ध और उनके दो प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे थे। यह जानकर बहुत खुशी हुई कि करीब चार मिलियन लोगों ने इन अवशेषों को नमन किया।”

विश्लेषकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री मोदी को त्रिपिटक भेंट करना भारत के आध्यात्मिक नेतृत्व और बौद्ध देशों के साथ उसके स्थायी संबंधों का प्रमाण है।

–आईएएनएस

एमके/

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