स्विट्जरलैंड बुर्का प्रतिबंध पर वारिस पठान ने कहा, वहां नहीं है भीमराव अंबेडकर का दिया हुआ संविधान

मुंबई, 2 जनवरी (आईएएनएस)। स्विट्जरलैंड में नए साल से महिलाओं के बुर्का और हिजाब पर प्रतिबंध लगाए जाने पर ‘एआईएमआईएम’ नेता वारिस पठान ने गुरुवार को कहा कि वहां पर डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिया हुआ संविधान नहीं है।

एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा, “स्विट्जरलैंड में डॉ. भीमराव अंबेडकर का संविधान नहीं है, लेकिन हमारे यहां पर संविधान है। हमारे यहां ज‍िसकी जो इच्‍छा हो, पहन सकता है। यहां पर ‘फ्रीडम ऑफ च्वाइस’ है। स्विट्जरलैंड में क्या होता है? उससे हमें कुछ लेना नहीं है। हमारे देश में क्या हो वो ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने को लेकर वारिस पठान ने कहा, इस नियम का पूरी तरह से उपयोग होना चाहिए। हमारा मानना है कि वर्शिप एक्ट 1991 का मकसद यही था कि 1947 तक के जितने भी धार्मिक स्थल थे, उसके प्रकृति को हम बदल नहीं सकते। दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में इस पर चर्चा हुई थी, इसके बाद यह कानून लाया गया था। जिसका पालन होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि “अब देखने को यह मिल रहा है कि कोई भी लोअर कोर्ट में याचिका डालता है, कोर्ट उस पर सर्वे का ऑर्डर देती है। अगर कोर्ट चार बजे सर्वे का ऑर्डर देती है, तो उसके तुरंत बाद 6.30 बजे सर्वे करने वाली टीम पहुंच जाती है। सभी जानते हैं फिर क्‍या होता है। संभल की ही घटना को देख लीजिए, तो वहां पर पांच मुसलमानों को गोली लग गई और वो शहीद हो गए। ऐसे में अगर प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट लागू होगा, तो ये घटनाएं बंद होगी और ऐसी अराजकता नहीं फैलेगी। पीएम मोदी और सीएम योगी जो देश में माहौल जो खराब करना चाहते हैं, वो रुकेगा। हमें पूरा यकीन है क‍ि इस पर सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा, वो अच्छा होगा।”

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–आईएएनएस

एससीएच/सीबीटी

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