खनिज ढोने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया है। जनरेट नहीं होगा ई-रवन्ना

राजस्थान, यूपी, गुजरात, एमपी, हरियाणा, पंजाब जैसे अन्य राज्यों में अनिवार्य

Media House बीकानेर-प्रदेश में खनिज ढोने वाले हजारों वाहनों के लिए 10 जून तक नया जीपीएस (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस – वीएलटीडी) सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। तय तारीख के बाद बिना जीपीएस वाले वाहनों का खान विभाग की ओर से ई-रवन्ना जनरेट नहीं किया जाएगा। बिना ई-रवन्ना खनिज ले जाते पकड़े जाने पर इसे अवैध परिवहन मानकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए खनि अभियंताओं को 20 मई से 5 जून तक विशेष कैंप लगाकर खान मालिकों, डीलर्स और ट्रांसपोर्टर्स को जीपीएस लगाने के लिए पाबंद करना होगा। इस संबंध में 12 मई को अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक भी बुलाई गई है। राजस्थान सहित यूपी, गुजरात, एमपी, हरियाणा और पंजाब जैसे अन्य राज्यों के जो भी वाहन यहां खनिज परिवहन करते हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से आईएएस 140 मानक का वीएलटीडी जीपीएस लगाना होगा। खास बात यह है कि यह जीपीएस खान विभाग द्वारा तय किए गए वेंडर्स से ही लगवाना होगा, तभी वाहन रजिस्टर्ड होंगे। इसे लगाने में प्रत्येक वाहन मालिक को करीब 10 हजार रुपये का शुरुआती खर्च उठाना पड़ेगा। इसके अलावा हर साल जीपीएस को चालू रखने के लिए 2000 से 3000 रुपये खर्च कर इसे रिचार्ज भी कराना होगा।

विभाग ने नया सिस्टम तो लागू कर दिया है, लेकिन इसके सफल होने पर अभी से सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले पुलिस, परिवहन और नगर निगम के वाहनों में लगाए गए जीपीएस सिस्टम तकनीकी खामियों के चलते फेल हो चुके हैं। जनवरी 2020 में जब खान विभाग और परिवहन विभाग की साइटों को आपस में जोड़ा गया था, तब भी विभागीय सर्वर में गड़बड़ी के कारण वाहनों की आरसी अपडेट न होने और ई-रवन्ना जारी या कन्फर्म न होने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में नए सिस्टम के सफल होने की कोई गारंटी नहीं है।

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केंद्र सरकार के परिवहन मंत्रालय ने 3 अगस्त 2022 को अधिसूचना जारी कर सभी एन-2 और एन-3 श्रेणी के भारी वाहनों में 1 सितंबर 2022 से ही आईएएस 140 मानक का वीएलटीडी जीपीएस अनिवार्य कर दिया था। इसके बावजूद अब खान विभाग ने अपने स्तर पर नए वेंडर्स से नया जीपीएस लगाने का यह फरमान जारी किया है। विभाग ने 3 जनवरी 2025 को आरएमएमसीआर 2017 में संशोधन कर नियम 7ए जोड़ा था, जिसके तहत 1 जनवरी 2026 से इसे अनिवार्य किया जाना था, लेकिन तकनीकी खामियों और साइट अपडेट न होने से इसकी अवधि बार-बार बढ़ती रही। By-DB

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