रेलवे के गुड्स शेड के एफसीआई में मजदूरों को तय मजदूरी नहीं मिलने को जांच करने पहुंचे लेबर इंस्पेक्टर
मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी बोकारो : बोकारो के रेलवे गुड्स शेड में एफसीआई के द्वारा रेलवे रेक में अनाज आता है और जिसको ट्रकों पर लोड कर बहादुरपुर, कृषि बाजार चास, और काशी झरिया के गोदामों में भेजा जाता है। लेकिन अनाज को लोडिंग और अनलोडिंग करने वाले मजदूरों को ना केंद्र सरकार की तय मजदूरी मिल पाती है और ना ही राज्य सरकार की। लेबर कमिश्नर ने भी उचित जांच कर मजदूरों के हक को दिलाने की बात कही थी। इस खबर को पहले भी प्रमुखता से दिखाने का काम किया गया था। खबर के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष डॉ रतन लाल मांझी ने मजदूरों के साथ हो रहे शोषण लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी और अपने पत्र के माध्यम से बोकारो उपायुक्त, मुख्यमंत्री झारखंड सरकार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय झारखंड सरकार, भारतीय खाद्य विभाग उपभोक्ता मामले भारत सरकार , खाद एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय भारत सरकार, श्रम आयुक्त बोकारो, तथा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन बोकारो झारखंड को इस मामले पर संज्ञान लेते हुए उचित जांच कर मजदूरों को उनका हक दिलाने की मांग की थी जिस पर बोकारो को उपायुक्त ने संज्ञान लेते हुए लेबर कमिश्नर को उचित जांच कर इस पर पहल करने का निर्देश दिया। इसी कड़ी में लेबर इंस्पेक्टर रेलवे के गुड्स शेड के एफसीआई में जांच करने पहुंचे और मजदूरों से बातचीत करते हुए मजदूरों को मिल रही मजदूरी और सुविधा का ब्यौरा लिया। रेलवे रेक से अनाज उतार रहे मजदूरों ने बताया कि रेक से अनाज उतारकर शेड में रखने पर प्रति बोरी ₹2 रुपए दिया जाता है और रेक से गाड़ी पर लोड करने पर 3 रुपये 30 पैसे प्रतिबोरी की दर से मजदूरी मिलती है। देखा जाए तो लोड अनलोड करने में झारखंड सहित बंगाल के मजदूर हैं जो 10 से 15 साल तक यही पर मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहें हैं जिसके कारण ठेकेदार के मुंशी से मिली धमकी और नौकरी छीन जाने की डर से कोई खुलकर बोलना नहीं चाहता है। लेबर इंस्पेक्टर की माने तो उन्होंने ने भी माना कि मजदूरों को जो तय सरकार द्वारा जो मजदूरी मिलनी चाहिए थी वह मजदूरों को नहीं मिल पा रही है। और मजदूर शोषण के शिकार हो रहे हैं।










