खनन न्यूज-करोड़ों की लागत से बना खनिज चेक पोस्ट बना दिखावा, खुलेआम बड़े पैमाने पर राजस्व की चोरी.!

 

मुकेश गुरूदेव, मीडिया हाउस महोबा-करोड़ो रूपये की राजस्व चोरी रोकने, अवैध खनिज का परिवहन रोकने के लिए तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार ने जिले में करोड़ो रुपए की लागत से चार साल पहले चेक गेट का निर्माण कराया था जो अब बेमतलब साबित हो रहे हैं। जिससे खनिज को प्रतिमाह करोड़ो की क्षति हो रही हैं । राजस्व चोरी रोकने के सरकारी प्रयास पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं।

जिले की बहुचर्चित पत्थरमंडी से खनिज राजस्व के रूप में 400 करोड़ रुपए मिलता है तो वहीं जीएसटी के रूप में 80 करोड़, आयकर के रूप में 8 करोड़ अग्रिम जमा के रूप में पत्थर कारोबारियों से मिलता है। इस मंडी से 5 हजार ट्रक प्रतिदिन गिट्टी लेकर रेलवे कारीडर, एक्सप्रेस वे आदि के लिए लेकर जाते है। यहां 350 स्टोन क्रेशर तथा 275 खनन पट्टे कार्यरत है । बढ़ते अवैध खनिज का परिवहन रोकने के लिए तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार ने एक नया सॉफ्टवेयर विकसित कराकर बांदा रोड तथा कानपुर रोड, पहरा एमपी बार्डर पर ऑनलाइन कनेक्ट कर चेक गेट बनवाए गए थे जिसमें अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए थे जो घूम घूम कर गिट्टी लेकर जाने वाले ट्रकों की फोटो लेते थे तथा ट्रक का नंबर ट्रेस कर परिवहन विभाग से कनेक्ट करते हुए बिना रॉयल्टी माल निकासी,ओवरलोड निकासी पर सीधे ऑनलाइन नोटिस जनरेट कर मालिक को पेनाल्टी के साथ भेज देते थे।

साथ ही महोबा कलेक्टरेट में एक ऑनलाइन आधुनिक सॉफ्टवेयर सुविधा युक्त कमांड ऑफिस बनाया गया था। जो दिन रात निकलने वाली गाड़ियों का डाटा संगृहीत कर खनिज को भेजता था। अब इन चेकगेटो में निगरानी के अभाव में ट्रक मालिकों की धांधली चरम पर चल रही है। ट्रक मालिक अपनी ट्रक की नंबर प्लेट बदलकर या बिना नंबर प्लेट या नंबर प्लेट के नंबरों में ग्रीस लगाकर वाहन चेकगेट से निकाल लेते है जिससे उक्त अवैध खनिज का परिवहन करने वाले ट्रक पकड़ में नहीं आ पाते।

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ऐसे सैकड़ों ट्रक प्रतिदिन बिना रॉयल्टी खनिज का अवैध परिवहन करते हैं । जिन पर खनिज विभाग शिकंजा नहीं कस पाता। खनिज अधिकारी स्टाफ न होने की बात कह कर इसे वाहनों पर एफआईआर आए दिन कराने की बात करते है लेकिन फिर भी इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। पट्टा धारक परेशान है बिना रॉयल्टी गिट्टी निकासी के चलते उनको ई नीलामी के पहाड़ की किश्ते देना भारी पड़ रहा है। जिससे बिना रॉयल्टी चलने वाली सैकड़ों गाड़ियों से प्रतिमाह करोड़ो का चुना लग रहा है।

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