राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान पंचायत में डिजिटल प्रशासन

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी नई दिल्ली-मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 से केन्द्रीय प्रायोजित संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) योजना को लागू किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों (ईआर) एवं अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण प्रदान कर पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) की क्षमता का निर्माण करना है, ताकि उनकी शासन क्षमताओं का विकास हो सके और वे नेतृत्वकारी भूमिका का प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए ग्राम पंचायतों को प्रभावी रूप से कार्य करने में सक्षम बना सकें। यह योजना गोरखपुर जिले सहित सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में लागू की जा रही है।

योजना के अंतर्गत पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों तथा अन्य हितधारकों की क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत समर्थित किया जाता है, जिनमें मूल अभिमुखीकरण एवं पुनश्चर्या प्रशिक्षण, विषयगत प्रशिक्षण, पंचायत विकास योजना तथा विशेषीकृत प्रशिक्षण शामिल हैं। विशेषीकृत प्रशिक्षण में एमआईएस डिजिटल पोर्टलों एवं प्लेटफॉर्मों, ई-ग्रामस्वराज पोर्टल आदि से संबंधित प्रशिक्षण सम्मिलित है। ये समस्त कार्यक्रम राज्य द्वारा अपनी वार्षिक कार्य योजना में प्रस्तावित किये जाते हैं तथा केन्द्रीय सशक्त समिति (सीईसी) द्वारा अनुमोदित किया जाता है। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर विभिन्न जिलों में ये प्रशिक्षण आयोजित करते हैं।

प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल (टीएमपी) के अनुसार, जिसमें संस्थान-वार जानकारी संकलित की जाती है, वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य में विभिन्न विषयों पर कुल 2,61,263 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। इसमें 1,228 प्रतिभागी ऐसे हैं जिन्हें ई-ग्राम स्वराज पोर्टल सहित एमआईएस डिजिटल पोर्टलों एवं प्लेटफार्मों पर विभिन्न ब्लॉक-स्तरीय संस्थानों में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। तथापि, टीएमपी पर गोरखपुर जिला संस्थान में एमआईएस/ई-जीएस से संबंधित किसी भी प्रशिक्षण की सूचना नहीं दी गई है।

मंत्रालय ने ग्रामीण प्रबंधन संस्थान, आनंद (आईआरएमए) के माध्यम से संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत लागू की गई ई-गवर्नेंस पहलों का मूल्यांकन किया है। मूल्यांकन से पता चलता है कि योजना, लेखांकन और लेखापरीक्षा प्रक्रियाओं के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों के अंगीकरण में सुधार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप पंचायती राज संस्थाओं द्वारा पारदर्शिता बढ़ी है, वित्तीय प्रबंधन बेहतर हुआ है और सेवा प्रदायगी में सुधार हुआ है।

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यद्यपि मंत्रालय जिला-विशिष्ट मूल्यांकन रिपोर्ट नहीं रखता है, लेकिन डिजिटल सुधार का समग्र मूल्यांकन कुछ संकेतकों जैसे योजनाओं और भुगतानों के लिए प्रसंस्करण समय में कमी, पंचायत योजनाओं और लेनदेन की ऑनलाइन उपलब्धता, वित्तीय डेटा की लेखापरीक्षा क्षमता और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों की इस विषय की जानकारी की बढ़ती पहुंच पर आधारित है। इसके अलावा, ई-ग्राम स्वराज पर इस मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोरखपुर जिले की सभी ग्राम पंचायतें ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपनी विकास योजनाएं तैयार कर रही हैं और विक्रेताओं को ऑनलाइन भुगतान करने के लिए ई-ग्राम स्वराज-पीएफएमएस इंटरफेस पर जुडी हैं। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 03 फरवरी को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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