सोनभद्र-खनन हादसे में पीड़ित परिवार को सपा द्वारा एक लाख रुपये का दिया चेक, पोकलेन मशीनों और ब्लास्टिंग के जरिए हो रहे बेलगाम अवैध खनन.!

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कृपा शंकर पांडेय,मीडिया हाउस ओबरा/ सोनभद्र-15 नवंबर को हुए एक खदान हादसे में सात आदिवासी मजदूरों की मौत हो गई। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और प्रत्येक परिवार को एक लाख रुपये के चेक वितरित किए। सपा ने उत्तर प्रदेश सरकार से मृतकों के परिवारों को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। सपा ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े लोगों के लिए काम करती है और कल्याणकारी राज्य के अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रही है। पार्टी ने सोनभद्र में पोकलेन जैसी बड़ी मशीनों और ब्लास्टिंग के जरिए हो रहे बेलगाम अवैध खनन पर चिंता व्यक्त की।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि अवैध खदानों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं, जिससे गहरी खुदाई और दीवारों के ढहने जैसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने क्षेत्र में अत्यधिक प्रदूषण के स्तर पर भी प्रकाश डाला, जिससे आम आदमी के लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा है। सपा ने सवाल उठाया कि खनन से होने वाले प्रदूषण और अवैध खनन को रोकने के लिए कोई प्रावधान क्यों नहीं किया जा रहा है, जबकि ब्लास्टिंग और मशीनों से खनन पर रोक है। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से अवैध खनन में लिप्त लोगों पर अंकुश लगाने और उन्हें बेनकाब करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोनभद्र एक ऐसा जनपद है जो अपनी खनिज संपदा और बिजली उत्पादन से प्रदेश को भारी राजस्व देता है, लेकिन यहां के स्थानीय लोगों की स्थिति दयनीय है। सरकार पर आरोप लगाया गया कि उसे क्षेत्र की समस्याओं की कोई चिंता नहीं है।प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को असंवेदनशील बताते हुए कहा कि घटनास्थल से मात्र 5 किलोमीटर दूर ‘आदिवासी गौरव’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके बावजूद, मृतकों के प्रति कोई संवेदना व्यक्त नहीं की गई और न ही कोई मुआवजा दिया गया। सरकार पर संविधान के संरक्षण में अपनी भूमिका ठीक से न निभाने का भी आरोप लगाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इससे पहले पीड़ित परिवार लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले थे।

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उस मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने बच्चों को 30,000 रुपये नकद सहायता प्रदान की थी। वहीं से सभी परिवारों को 1 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा भी की गई थी। सपा प्रतिनिधिमंडल ने परिवारों की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की, जहां छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर पा रही है। सपा ने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार बनने पर निश्चित रूप से मदद की जाएगी, जिसमें प्रत्येक महिला को 40,000 रुपये की सहायता प्रदान करना शामिल है ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें। पीड़ित परिवारों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने अपनी ओर से कोई सहायता नहीं दी है। उनके मुताबिक, केवल श्रमिक योजना के तहत 1.25 लाख रुपये की अनुबंधित राशि संबंधित विभाग द्वारा दी गई है। प्रतिनिधिमंडल ने खदान की वैधता, खनन नियमों का पालन, श्रमिकों की सुरक्षा के इंतजाम और आकस्मिक मृत्यु के बाद मुआवजे जैसे बिंदुओं पर सरकार से गहन जांच की मांग की। सपा प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से अपने कर्तव्य का पालन करने और प्रत्येक पीड़ित परिवार को मुआवजे के साथ-साथ धनराशि बढ़ाकर कम से कम 50 लाख रुपये देने की अपील की, ताकि वे अपना जीवन ठीक तरीके से चला सकें।

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खनन हादसे में परिवार के दो सदस्यों को खोने वाली पीड़िता ने कहा कि अखिलेश यादव के द्वारा भेजे गए प्रतिनिधियों के द्वारा उनके लिए एक-एक लाख रु का चेक दिया गया। पीड़िता ने कहा सरकार से उनकी मांग है कि 50 लाख रुपए के साथ-साथ हम पीड़ित परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए। वही सपा जिला उपाध्यक्ष रमेश यादव ने कहा कि लखनऊ मैं एक सपा की टीम सोनभद्र से गई थी और जो यहां के पीड़ित परिजन थे। उन्हें 25-25 हजार नगद एवं उनके रहने खाने की व्यवस्था करते हुए एक प्रतिनिधिमंडल का चयन किया गया था। जिसने पीड़ित के परिजनों के घर पर आकर उनको एक-एक लाख रुपए का चेक प्रदान किया। रमेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद एवं उनके साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया ।

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