राज्यसभा सांसद डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने आयुष मंत्री से पूछा- बिहार को और आयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर कब

बिहार में आयुर्वेदिक ढांचा पर्याप्त है या नहीं? राज्यसभा में डॉ. धर्मशीला गुप्ता का सवाल

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी भाजपा की राज्यसभा सांसद डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने संसद में बिहार में आयुर्वेदिक सेवाओं और अनुसंधान से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव गणपतराव जाधव से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि बिहार की आबादी और वहां आयुर्वेद की लोकप्रियता को देखते हुए क्या राज्य की मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल बिहार में किसी नए आयुर्वेदिक अनुसंधान केंद्र का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या सरकार ने कोई गैप एनालिसिस कराया है, जिससे यह आकलन हो सके कि वर्तमान आयुर्वेदिक ढांचा राज्य की जरूरतों को पूरा कर पा रहा है या नहीं।

उन्होंने बताया कि बिहार में इस समय 294 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए आयुष सेवाएं दी जा रही हैं। पटना में 50 बेड का आयुष अस्पताल संचालित है, जबकि राज्य भर में 241 आयुष डिस्पेंसरी काम कर रही हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सात नए 50 बेड वाले आयुष अस्पतालों को मंजूरी दी है और तीन 10 बेड वाले अस्पतालों को भी स्वीकृति देने की प्रक्रिया चल रही है। लगभग 450 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से भी आयुष सेवाएं लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं।

राज्यसभा सांसद ने यह भी कहा कि देश के 14 राज्यों, जिनमें बिहार भी शामिल है, में केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRS) के संस्थानों के माध्यम से जनजातीय स्वास्थ्य और उपजना पर शोध किया जा रहा है। वहीं 18 राज्यों में 20 CCRS संस्थानों के जरिए अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े अनुसंधान कार्य भी चल रहे हैं।

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अपने दूसरे पूरक प्रश्न में डॉ. गुप्ता ने पूछा कि CCRS के तहत देशभर में चल रहे 30 आयुर्वेदिक अनुसंधान केंद्रों में हो रहे शोध को क्या सरकार बाजार के लिए तैयार उत्पादों में बदलने के लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी कर रही है, ताकि आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके।

जवाब में आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद पिछले 12 वर्षों में आयुर्वेदिक अनुसंधान को नई दिशा मिली है। CCRS के माध्यम से व्यापक स्तर पर शोध कार्य किए जा रहे हैं और निजी दवा निर्माण कंपनियों के साथ मिलकर आयुष आधारित दवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

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