कुंभ की भव्यता देखकर मोहित हुए श्रद्धालु, युवा वर्ग का बढ़ रहा आकर्षण

महाकुंभ नगर, 18 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ के आयोजन के दौरान संगम आरती का दृश्य कुछ खास होता है। इस अद्वितीय पल का हिस्सा बनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आईएएनएस ने वहां मौजूद कुछ श्रद्धालुओं से बात की, जिन्होंने कुंभ की भव्यता और यहां के आध्यात्मिक माहौल के बारे में अपनी राय साझा की।

मनीष शर्मा ने बताया कि यहां का माहौल बेहद भव्य और आकर्षक है। पंडालों की विशालता और उनकी सुंदरता को देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। श्री कृष्ण के पंडाल ने मुझे बहुत प्रभावित किया, वह भी बहुत ही भावनात्मक और आकर्षक था। यह साफ महसूस होता है कि यह आयोजन समाज के हर वर्ग के लिए एक विशेष महत्व रखता है।

उन्होंने कहा कि वह एक यूट्यूबर को देखकर यहां आए हैं। इस आयोजन की जानकारी दुनिया तक पहुंचाने में मीडिया और यूट्यूबर्स का बहुत बड़ा योगदान है। सनातन संस्कृति की ओर आजकल युवाओं का आकर्षण बढ़ा है।

रायपुर की रेखा ने बताया कि यहां आकर ऐसा लगता है कि जैसे पूरे भारत के लोग एक साथ संगम की पवित्र नदियों में आ गए हैं। अगर कोई व्यक्ति कहीं नहीं जा सकता तो वह यहां आकर भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अनुभव कर सकता है। गंगा मैया की कृपा से यह सब संभव हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, खासकर युवा वर्ग में। युवाओं का इस दिशा में आकर्षित होना एक सकारात्मक बदलाव है और इसके पीछे प्रचार का बहुत बड़ा हाथ है। यहां के पंडाल बहुत सुंदर हैं। यह आयोजन वास्तव में एक अद्भुत और दिव्य है।

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नीलम ने बताया कि यहां आकर ऐसा लग रहा है कि जैसे हमने बद्रीनाथ के दर्शन कर लिए हों, भले ही हम वहां न गए हों। संगम के इस पवित्र स्थल पर आकर वह कमी पूरी हो रही है, जो हम महसूस कर रहे थे। यह स्थान सचमुच भक्तिमय है और हम इस दिव्य ऊर्जा से सराबोर हो रहे हैं। हम अभी यहां आए हैं, और इस मंदिर में जो वातावरण है, वह बहुत ही अद्भुत है।

सनातन संस्कृति के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं यह कहूंगी कि हमारे युवाओं को अपने धर्म के प्रति जागरूक होना चाहिए। धर्म और आस्था के मार्ग पर ही जीवन में सही दिशा मिल सकती है। हम सब अपने बचपन में घर में पूजा-पाठ करते थे और यही परंपरा हमें आज भी सशक्त बनाती है। संगम की इस भव्यता और पवित्रता को देख कर हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे, लेकिन यहां आकर यह अनुभव बहुत ही अद्भुत है।

एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि यह स्थान बहुत ही अच्छी सुविधाओं से सुसज्जित है। जब भी कोई बड़ा त्यौहार होता है, तो यहां आने वाले लोग और उनके अनुयायी एक अद्भुत माहौल का निर्माण करते हैं। इस भीड़ में एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है। अगर आप दिन भर घर पर बैठे रहते हैं और बोरियत महसूस कर रहे हैं, तो यहां आकर आप नई उत्साह और ऊर्जा से भर जाते हैं। यह वास्तव में एक बहुत ही अच्छा माहौल है।

अभिषेक शर्मा ने बताया कि पहले लोग महाकुंभ में कम आते थे, लेकिन अब युवाओं का आकर्षण बढ़ा है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब हम सतयुग की ओर बढ़ रहे हैं। अब युवाओं में सनातन धर्म और इसकी परंपराओं के प्रति आकर्षण बढ़ता जा रहा है। पहले लोग ज्यादा पार्टी वगैरह में रहते थे, लेकिन अब प्रेमानंद जी जैसे व्यक्तित्व और अन्य लोग सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को जागरूक कर रहे हैं, और उनका प्रभाव बढ़ रहा है।

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उन्होंने कहा कि यहां की प्रेम और शांति मुझे बहुत अच्छी लग रही है। यह जगह और यहां का माहौल वाकई बहुत भव्य है, और मुझे गर्व महसूस हो रहा है कि मैं इलाहाबाद का रहने वाला हूं। चाहे हम किसी भी धर्म के हों, हमें अपने धर्म का पालन करना चाहिए क्योंकि हर धर्म में जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए कुछ न कुछ विशेष है। हमें उसे समझकर और मानकर अपने जीवन में लागू करना चाहिए।

सुरेश कुमार ने कहा कि प्रयागराज में जो संगम है, वह सिर्फ एक भौतिक जगह नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभव है। गंगा, सरस्वती और यमुना जी हमारे जीवन के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रतीक हैं। गंगा मां हमारे पाप धोने वाली हैं, सरस्वती ज्ञान की देवी हैं और यमुना जी हमारे कर्मों के पालन का प्रतीक हैं। महाकुंभ में आकर हमें अपने कर्म, धर्म और सत्य को समझने का अवसर मिलता है।

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि इस बार का महाकुंभ 144 वर्षों के बाद हो रहा है और यह कई मायनों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरा इलाहाबाद इस आयोजन के लिए दुल्हन की तरह सजा हुआ है। इस साल बहुत बड़े पैमाने पर अंतर्राष्ट्रीय स्टार्स भी यहां आ रहे हैं। यहां की व्यवस्था बहुत उच्चस्तरीय है, और संगम से लेकर फाफामऊ तक पंडाल और अन्य आकर्षणों से सजा यह पूरा क्षेत्र एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा है। पूरे शहर में इस आकर्षण का प्रभाव देखा जा सकता है, और देश भर से लोग यहां आ रहे हैं। जहां हम खड़े हैं, वहां के पास ही प्रमुख घाट है, और यहां की व्यवस्था बहुत शानदार तरीके से की गई है।

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–आईएएनएस

पीएसके/एकेजे

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