बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु 746 कस्तूरबा विद्यालय संचालित

मीडिया हाउस लखनऊ – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में रविवार को लोकभवन सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि लागू करते हुए इसे 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह किया गया। इस अवसर पर चयनित 14 अनुदेशकों को प्रतीकात्मक चेक वितरित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय तथा बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में ‘होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड’ का विमोचन भी किया गया, जिसे बाल वाटिका से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक, संज्ञानात्मक एवं व्यक्तित्व विकास के विभिन्न आयामों का समग्र मूल्यांकन किया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि यह आयोजन हजारों शिक्षा योद्धाओं के समर्पण, तपस्या और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को सम्मानित करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि अंशकालिक अनुदेशक सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा की अलख को निरंतर प्रज्ज्वलित रखते हुए बच्चों को खेल, कला, अनुशासन, संस्कार और जीवन कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जोड़ रहे हैं, जो मजबूत राष्ट्र की नींव तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा हेतु 9,645 तथा कार्यानुभव शिक्षा हेतु 6,192 अनुदेशक कार्यरत हैं, जो विद्यालयों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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मंत्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2022 में मानदेय को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह किया जाना सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आईसीटी लैब एवं आधुनिक पुस्तकालय जैसी सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जिससे ये विद्यालय नवाचार के केंद्र बनकर उभरे हैं। वर्तमान में 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

मंत्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित हैं तथा शेष सभी ब्लॉकों में भी बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाने की कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 1,64,882 बच्चों को निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिला है। सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु डीबीटी प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाएं सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा को केवल योजना न मानकर सामाजिक परिवर्तन और प्रदेश के समग्र विकास का प्रमुख माध्यम बनाया गया है।

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