हिमालय की गोद से निकली नदी इलाके हर साल मचाती है तबाही

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 29ता.बैरगनिया (सीतामढ़ी)। नेपाल हिमालय की गोद से निकली बागमती एवं लाल बकेया नदी बैरगनिया इलाके में हर वर्ष तबाही मचाती है। इस इलाकें के बागमती एवं लाल बकेया नदी के हाल से हर कोई वाकिफ है। यानी यह नदी कब किस तरफ अपनी मोड़ लेगी, यह कहना मुश्किल होता है। इस नदी की धारा के बारे में आज तक सटीक अध्ययन नहीं किया जा सका है। नदी के कटाव के कारण बागमती एवं लालबकेया नदी किनारे के खेतिहर जमीन हर वर्ष नदी मे विलिन होता जा रहा है। लालबकेया नदी में करीब 20 बर्षो से कटाव जारी है। पहले लालबाकेया नदी पूर्वी चंपारण जिले के सिकरहना सिंचाई विभाग के अधीन था। तो कटाव से बचाव हेतु विभाग द्वारा समय समय पर कार्य किया जाता था, परंतु जब से सीतामढ़ी बागमती सिंचाई परियोजना के अधीन हुआ है। तब से इस पर कोई ध्यान नहीं है। इधर लालबकेया नदी द्वारा कटाव के कारण करीब 100 एकड़ से अधिक खेतिहर जमीन नदी मे समा गया है। लाल बकेया नदी का कटाव अब भी जारी है। अगर जल्द ही कटाव रोकने की कोई उपाय नहीं किए गए, तो लालबकेया नदी के द्वारा हो रहे कटाव मे खेतिहर जमीन को लगातार आगोश में लिया जा रहा है। साथ-साथ नदी के तट पर सन 1952 मे स्थापित बाबा भूतेश्वरनाथ का भव्य महादेव मंदिर को भी नदी अपनी आगोश मे लेने को उतारू है। बताते चले कि बागमती एवं लालबकेया नदी का उदगम स्थल नेपाल है। जहां यह नदी बिल्कुल स्थिर होती है। परंतु जब यह यहां भारतीय क्षेत्र मे प्रवेश करती है तो इसका विकराल रूप देखते ही बनता है। हर वर्ष बाढ़ के दौरान बागमती एवं लालबकेया नदी का तांडव अजीब होता है। नदी में पानी का लेवल हल्का बढ़ता है कि इसकी रूपरेखा बदलना शुरू हो जाती है। यानी नदी कटाव करने लगती है। बैरगनिया प्रखंड में बागमती एवं लालबकेया नदी का कटाव शुरू है। अबतक दर्जनों किसानों की खेतिहर जमीन नदी अपने आगोश में ले चुकी है। किसान कटाव देख रहे हैं। उनके वश में नहीं है कि वे कटाव को रोक सकें। फसल लगी खेत नदी में जाते देख मानों किसानों का कलेजा फट रहा है। जिन गांवों के लोगों का खेत नदी के कटाव से प्रभावित है, उनमें बागमती नदी के कटाव मे बेंगाही, बेल, जोरियाही और परसौनी है, तो वही लालबकेया नदी के किनारे हो रहे कटाव से अशोगी, सिंदुरिया, डूमरवाना, सेखौना के लोग प्रभावित हो रहे है। नाम नहीं प्रकाशित करने के शर्त पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नदी के कटाव को रोकने के लिए अभी कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। जब पानी कम होगा तो निरीक्षण के बाद कुछ किया जा सकता है। मालूम हो कि यह सब सिर्फ आश्वासन है। कटाव रोकने के लिए कोई भी सार्थक कदम अब तक नहीं उठाया गया है।








