संजय राऊत के वीआईपी कल्चर बयान पर चंद्रांशु महाराज ने दी तीखी प्रतिक्रिया, मंत्री नितेश राणे के बयान का किया समर्थन

मुंबई, 30 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार पश्चिम में कथा कहने आए प्रसिद्ध कथावाचक चंद्रांशु महाराज ने गुरुवार को आईएएनएस से बातचीत की। चंद्रांशु महाराज ने महाकुंभ में भगदड़, संजय राऊत के वीआईपी कल्चर बयान समेत कई सवालों के जवाब दिए।

महाकुंभ में भगदड़ के सवाल के जवाब में चंद्रांशु महाराज ने कहा कि महाकुंभ में भगदड़ की घटना दुखद है। परंतु वास्तव में भगदड़ का जिम्मेदार पब्लिक दबाव बहुत ज्यादा था। प्रशासन की गाइडलाइंस तोड़ने और बैरिकेडिंग तोड़ने के कारण भगदड़ हुई। कुछ लोगों ने अफवाह फैलाने का काम किया जिस कारण भगदड़ मची। कहीं न कहीं अनुशासन की कमी रही। प्रशासन ने अपनी तरफ से चाक चौबंद व्यवस्था की थी। फिर भी अगर कहीं न कहीं भूल रही हो तो उसे सुधारना चाहिए, ताकि इस तरह की घटना दोबारा न हो।

संजय राऊत का कहना है कि वीआईपी कल्चर के लिए भाजपा जिम्मेदार है। इस पर चंद्रांशु महाराज ने कहा कि संजय राऊत हमेशा लाइमलाइट में बने रहने के लिए हर जगह सियासत करते हैं। वे वही काम कर रहे हैं, जो कभी बाला साहेब ठाकरे ने कांग्रेस के लिए कहा था, उसे अब किनारे कर दिया और इंडी गठबंधन के स्वार्थ में शामिल हो गए। ऐसे लोगों की बातों को सुनना नहीं चाहिए। वीआईपी कल्चर की जहां तक बात है मैं उसका साक्षी रहा हूं। पहले से सीएम योगी ने इस बात को कहा था कि सारे वीआईपी प्रोटोकॉल बंद रहेंगे। वहां पर सभी वीआईपी प्रोटोकॉल बंद हैं। अमित शाह भी संत परंपरा के आचार्य महामंडलेश्वर के साथ में स्नान करते नजर आ रहे हैं। वीआईपी कल्चर को लेकर संजय राऊत का बयान निंदास्पद है।

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मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में ड्रेस कोड लागू किया गया है, ये सही है क्या? इस पर उन्होंने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई में होते हुए भी पूरे देश की आस्था का केंद्र बना हुआ है। जो भी मुंबई आता है वो सिद्धिविनायक गणेश भगवान को प्रणाम करना चाहता है। देवताओं के समान होकर देवताओं की पूजा करना चाहिए। इसलिए सिद्धिविनायक मंदिर ने यह कहा भारतीय परंपरा, सनातन परंपरा और पूजा में विधि में आपत्तिजनक और अश्लील कपड़े बैन हो,अगर ऐसा कोई विचार दे रहा तो निश्चित तौर सराहनीय है।

मंत्री नितेश राणे ने मांग की है कि एग्जाम में स्कूल-कॉलेज में बुर्का बैन हो। इस पर चंद्रांशु महाराज ने कहा कि बुर्का शिक्षा पद्धति से जुड़ा नहीं है। एक मजहब से जुड़ा हुआ वस्त्र है। मैं निश्चित तौर कहता हूं कि बुर्का पहनाने का काम वो ही कर रहे हैं, जो लोग हलाला के नाम पर एक ही बेटी की सरेआम इज्जत नीलम करते रहते हैं। पूर्व दिनों में सरकार ने कानून बनाकर बुर्का बैन भी किया। शिक्षा में बुर्का होना यह अनिवार्य ही नहीं है। क्योंकि जो लोग परीक्षा देने के लिए जा रहे हैं, सिर ढका हुआ है और मुंह छिपा हुआ है तो यह पता कैसे चलेगा कि परीक्षार्थी कौन है, वही है या कोई और है। अपने मजहब को शिक्षा पर थोपना ये अज्ञानता और मूर्खता की कहीं न कहीं निशानी है। इसलिए मंत्री के बयान का स्वागत किया जाना चाहिए।

औरंगजेब की कब्र हटनी चाहिए। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान पवित्र भूमि है। इस पर किसी भी आक्रांता, किसी भी लुटेरे के लिए कोई जगह नहीं है। जिसने हमारी सनातन संस्कृति को चोट पहुंचाई, जिसने हमारी माताओं बहनों का अस्मिता को लूटा, जिसने भी कहीं न कहीं हम सबके मान सम्मान को तार-तार करने का काम किया, जिसने हमारे मंदिरों, धर्मशालाओं को और हमारी विरासत को तोड़ने का काम किया ऐसे किसी भी गुलामी की निशानी को तोड़कर बहा देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जहां-जहां खुदाई हो रही है, वहां-वहां शिवलिंग ही मिल रहा है। तब यह जरूरी हो जाता है कि ऐसे जिहादियों के जितने भी चिन्ह हैं, जो गुलामी की दास्तां को दोहरा रहे हैं उनके नाम और निशान की कोई वस्तु होनी नहीं चाहिए। उसको मिटा देना चाहिए। अगर भाजपा खुद को राष्ट्रवादी कहती है तो उसे राष्ट्र के हर चिन्हों को स्वीकार करना चाहिए। राष्ट्रहित में सभी कदम उसको उठाने चाहिए।

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–आईएएनएस

एफजेड/

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