सरकारी स्तर पर आयोजित प्रथम केसरिया महोत्सव में सुरों का जलवा बिखेर डाॅ.नीतू कुमारी नूतन ने रचा था नया इतिहास

अवनीश श्रीवास्तव
मीडिया हाउस 29ता.मोतिहारी। केसरिया महोत्सव में कल फिर डाॅ.नूतन के स्वर में डूबेंगे संगीत प्रेम अपनी अद्भुत कला- प्रतिभा की बदौलत विश्वक्षितिज पर नित्य नए कीर्तिमान स्थापित कर रहीं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध गायिका, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की ब्रांड एम्बेसेडर व चंपारण की बेटी डाॅ. नीतू कुमारी नूतन केसरिया महोत्सव- 2023 में 29 नवंबर को एक बार फिर अपनी स्वर लहरियों से नये इतिहास रचने आ रही हैं। केसरिया महोत्सव के सरकारी स्तर पर आयोजन को 23 साल हो गए। केसरिया महोत्सव के इतिहास और यादें डाॅ. नूतन के बगैर पूरी हो ही नहीं सकतीं। इन वर्षो के अंतराल में दर्शकों की मांग पर जिला प्रशासन ने डाॅ.नूतन को क्ई बार केसरिया महोत्सव के मंच पर आमंत्रित भी किया तथा अपनी सुमधुर गायिकी से उन्होंने चंपारण के संगीतप्रेमियों को हर बार तृप्त भी किया और उनकी प्यास भी बढ़ा दी। सरकारी स्तर पर केसरिया महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई और उक्त महोत्सव में परफार्म करने का रेकार्ड चंपारण की बेटी डाॅ. नीतू कुमारी नूतन के नाम इतिहास में दर्ज है। प्रथम केसरिया महोत्सव के सांस्कृतिक सत्र का आगाज डाॅ. नूतन के गायन से हुआ। इस तरह सदियो- सदियों तक केसरिया महोत्सव से डाॅ.नूतन का नाम जुड़ गया है। तब से आज तक डाॅ.नूतन ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कला- संगीत- साहित्य के क्षेत्र में कई नये- नये कीर्तिमान स्थापित किए। देश के महोत्सवों की पर्याय बन चुकीं डाॅ.नूतन संप्रति केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड, भारत सरकार की वरीय सदस्य हैं, जबकि लगातार दो सत्रों तक वे भारतीय संगीत नाटक अकादमी , संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की सदस्य रहीं। इतिहास की इस कड़ी में एक और बात जुड़ जाती है, वह यह कि दर्शकों की मांग पर 2007 के प्रथम केसरिया महोत्सव में जिलाधिकारी जीवन कुमार सिन्हा ने पुन: दूसरे दिन उनका कार्यक्रम तय कर दिया। उस दिन उनके साथ साजिंदों की जो टीम थी, आज भी उनके साथ वही टीम हैं। अपने फन के विद्वान फनकार वे सभी संगत कलाकार कल फिर डाॅ.नूतन के साथ संगत कर कला की नयी इबारत लिखेंगे। अंतर सिर्फ इतना होगा कि कल की टीम में तबलावादक का नाम बदल जाएगा। केसरिया महोत्सव-2007 में डाॅ.नूतन के साथ तबला पर दोनों हीं दिन हमने संगत किया था, जबकि नाल पर बिहार के सर्वश्रेष्ठ वादक पंडित अर्जुन चौधरी और बांसुरी पर मोहम्मद सर्फुद्दीन थे। अर्जुन जी और सर्फुद्दीन डाॅ. नीतू कुमारी नूतन और पद्मभूषण श्रीमती शारदा सिन्हा के स्थाई तौर पर संगत करते हैं। इधर अर्जुन चौधरी जी मैथिली ठाकुर के साथ भी नाल बजाने लगे हैं। कला के माध्यम से नये इतिहास रचने वाली चंपारण, बिहार और भारत की कीर्तिवंत डाॅ. नीतू कुमारी नूतन का केसरिया की धरती पर चंपारण के समस्त साहित्य व कलाकर्मियों की ओर से हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत है।

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