वाशिंगटन के 'रेसिप्रोकल टैरिफ' का जवाब देने के लिए सोल तैयार : दक्षिण कोरिया

सोल, 31 मार्च (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के व्यापार मंत्री ने सोमवार को कहा कि उनका देश अमेरिका की तरफ से लगाए गए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ (पारस्परिक शुल्क)’ के खिलाफ तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि वे नए बाजारों में विस्तार करने वालों को पूरी मदद देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

व्यापार मंत्री चियोंग इन-क्यो ने सोल में निर्यातकों के साथ एक बैठक में यह बयान दिया।

उनका यह बयान तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार बुधवार (अमेरिकी समय) को अन्य देशों की ओर से अमेरिकी निर्यात पर लगाए गए शुल्क के जवाब में रेसिप्रोकल टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा करने वाली है।

रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब है एक समान टैरिफ. ट्रंप का कहना है कि कोई देश अमेरिकी सामान पर जितना टैरिफ लगाएगा उतना ही टैरिफ अमेरिका भी उस देश पर लगाएगा।

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार, उद्योग और ऊर्जा मंत्रालय ने चेओंग के हवाले से कहा, “हम 2 अप्रैल को अमेरिकी की तरफ से लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हम अपनी कंपनियों के हितों की बेहतर रक्षा करने के लिए अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं।”

मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने कहा, “हम प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते संरक्षणवाद से निपटने के लिए नए बाजारों की तलाश करने वाले निर्यातकों को और ज्यादा समर्थन देंगे।”

नई टैरिफ प्लान का दक्षिण कोरियाई अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है, क्योंकि निर्यात देश की प्रमुख आर्थिक वृद्धि का स्रोत है।

मंत्रालय के अनुसार, निर्यातकों ने सरकार से अमेरिकी शुल्क नीति के असर को कम करने में सक्रिय रूप से मदद करने की मांग की।

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इस बीच, कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू ने पिछले सप्ताह यह वादा किया कि वह व्यवसायों को वैश्विक ‘व्यापार युद्ध’ से बचाने के लिए विशेष सहायता देंगे।

हान ने यह टिप्पणी कोरिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और फेडरेशन ऑफ कोरियन इंडस्ट्रीज सहित छह प्रमुख व्यापारिक संगठनों के नेताओं के साथ बैठक के दौरान की। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी आयातित वाहनों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा का जिक्र किया।

अपने सरकारी आवास पर बैठक के दौरान उन्होंने कहा, “हमारी अर्थव्यवस्था मुश्किल में है क्योंकि बाहरी स्तर पर व्यापारिक माहौल और प्रतिद्वंद्वी देशों से तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। वहीं, अंदरूनी स्तर पर घरेलू राजनीतिक स्थिति अस्थिर है और घरेलू मांग में सुस्ती जारी है।”

–आईएएनएस

एसएचके/एमके

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