त्रिदिवसीय साहित्योत्सव में विद्यार्थियों ने दिखाई अपनी तार्किक व बौद्धिक क्षमता

मीडिया हाउस न्यूज एजेंन्सी 28ता०बोकारो। शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में साहित्यिक गुणों का विकास करने के उद्देश्य से डीपीएस बोकारो में तीन-दिवसीय साहित्योत्सव (लिटरेरी फेस्ट) आयोजित किया गया। इसके तहत विद्यार्थियों ने हिन्दी-अंग्रेजी वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में जहां अपनी कुशल बौद्धिक व तार्किक क्षमता का परिचय दिया, वहीं वर्तनी प्रतियोगिता (स्पेलिंग कंपीटिशन) में शब्दों पर अपनी मजबूत पकड़ का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। ‘बोधी- द इनलाइटनमेंट’ नामक इस आयोजन के पहले दिन ‘तेजी से बढ़ता डिजिटलीकरण दुष्प्रचार एवं असत्य सूचना को बढ़ावा दे रहा है’ विषय पर अंग्रेजी वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। पक्ष के प्रतिभागियों ने जहां इंटरनेट व डिजिटलीकरण को अधिकाधिक सूचना व ज्ञानार्जन, तकनीकी व वैज्ञानिक विकास का माध्यम बताया, वहीं विपक्ष में बच्चों ने साइबर अपराध, निजता हनन आदि का तर्क देते हुए इसे वैश्विक समस्याओं का बड़ा कारण बताया। प्रतियोगिता में झेलम सदन की श्रेष्ठा रूपम द्विवेदी प्रथम, चेनाब की समृद्धि प्रताप दुबे व रावी हाउस की देवलीना बनर्जी द्वितीय तथा जमुना सदन की लीजा सिंह तृतीय स्थान पर रही। प्रतियोगिता के दूसरे दिन ‘कृत्रिम बौद्धिक क्षमता का विकास- वरदान या अभिशाप’ विषय पर हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। इसमें पक्ष के प्रतिभागियों ने सूचनाओं के सत्यापन एवं कम समय में सटीक व अधिक सूचनाएं प्राप्त करने की दिशा में इसे लाभप्रद बताया। वहीं, विपक्ष में इसे मानव की प्राकृतिक बौद्धिक क्षमता में कमी एवं रोजगार संकट का बड़ा कारण बताया। प्रतियोगिता में सतलज हाउस की अक्षरा रॉय शर्मा व झेलम के यश गौरव ने संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया। जमुना सदन की हर्षिता सिंह दूसरे तथा चेनाब हाउस की प्राप्ति एवं रावी के पृथ्वी राज चौहान तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, तीसरे दिन वर्तनी प्रतियोगिता में अंग्रेजी के जटिल व क्लिष्ट शब्दों की प्रश्नोत्तरी रोचक रही। बच्चों ने शाब्दिक पहेलियां सुलझाकर अपने साहित्यिक कौशल का परिचय दिया। इसमें सतलज ने 80 अंकों के साथ पहला, 70-70 अंकों के साथ चेनाब व गंगा ने संयुक्त रूप से दूसरा तथा 65 अंक लाकर रावी सदन ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए एस गंगवार ने प्रतिभागियों के प्रदर्शन को सराहते हुए विद्यार्थियों को अच्छा वक्ता बनने के लिए एक अच्छा श्रोता बनने की भी प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने स्कूल में होनेवाली इस प्रकार की गतिविधियों में अवश्य भाग लें। इससे उनकी शैक्षिक क्षमता व प्रतिभा भी निखरती है। किताबी ज्ञान ही आज के समय में काफी नहीं है।
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