बिहार की विरासत को मिलेगी नई उड़ान : लिट्टी-चोखा, चना सत्तू, बथुआ आम को जीआई टैग दिलाने के लिए करेंगे आवेदन

सबौर, 29 मार्च (आईएएनएस)। बिहार की पारंपरिक कृषि संपदा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए बिहार के फेमस लिट्टी-चोखा, चना सत्तू और बथुआ आम को जीआई टैग दिलाने के लिए औपचारिक तौर पर आवेदन करने की मंजूरी दी गई है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में शनिवार को आयोजित जीआई पंजीकरण की 10वीं समीक्षा बैठक अनुसंधान निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें कृषि जगत के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान बिहार के तीन और कृषि उत्पादों लिट्टी-चोखा, बिहार चना सत्तू और बथुआ आम को जीआई टैगिंग के लिए औपचारिक रूप से जीआई रजिस्ट्री कार्यालय, चेन्नई को आवेदन भेजने की स्वीकृति दी गई।

इस वित्त वर्ष में बीएयू, सबौर ने 30 उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण की दिशा में कार्य किया, जिसमें से पहले ही आठ उत्पाद, मालभोग चावल, पटना दुहिया मालदा, बिहार सिंघाड़ा, सीता सिंदूर, हाजीपुर का चिनिया केला, मगही ठेकुआ, बिहार तिलौरी और बिहार अधौरी जीआई टैगिंग हेतु भेजे जा चुके थे।

अब तीन और उत्पादों की स्वीकृति के साथ, बिहार के कुल 11 कृषि उत्पादों को आधिकारिक रूप से जीआई पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही, बीएयू, सबौर ने 2024-25 के लिए निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है।

बैठक में जीआई पंजीकृत उत्पादों के उपयोगकर्ताओं की संख्या को 1,000 तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया। यह पहल स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने के साथ-साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने का भी सशक्त माध्यम बनेगी।

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इस महत्वपूर्ण अवसर पर बीएयू के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा, “भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण बिहार के विशिष्ट कृषि उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और किसानों की आर्थिक समृद्धि बढ़ाने का एक क्रांतिकारी कदम है। यह पहल हमारी समृद्ध कृषि विरासत की सुरक्षा के साथ-साथ बाजार में उनकी विशिष्टता को भी मजबूत करेगी।”

बीएयू के अनुसंधान निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि बिहार के अधिक से अधिक पारंपरिक कृषि उत्पादों को जीआई टैगिंग प्राप्त हो। इस वर्ष का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है, जो बिहार को ‘जीआई हब’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हमारा अगला कदम इन उत्पादों की बाजार पहुंच को और अधिक सशक्त बनाना और किसानों को इसके अधिकतम लाभ दिलाना है।”

बीएयू, सबौर की यह पहल स्थानीय किसानों को सशक्त बनाने, कृषि नवाचार को बढ़ावा देने और बौद्धिक संपदा संरक्षण के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक दृष्टि के अनुरूप है। जीआई टैगिंग से बिहार के अनूठे कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में एक नई पहचान मिलेगी, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और राज्य की समृद्ध कृषि विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

–आईएएनएस

एकेएस/एकेजे

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