राजनेता, शासन, प्रशासन और खनन माफियाओं की गठजोड़ से खेला जा रहा है खनन क्षेत्र में खूनी खेल-भाकपा

Media House सोनभद्र। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ओबरा के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में बीते शनिवार को हुए खनन हादसा को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष खनन हादसे में मृतकों के प्रति दो मिनट का मौन धारण कर शोक सभा करने के पश्चात धरना देकर आक्रोश प्रदर्शन किया । जहां पार्टी नेताओं ने कहा कि 15 नवम्बर 2025 को विल्ली मारकुंडी, ओबरा — सोनभद्र में माइन्स की बड़ी चट्टान गिरने से माइन्स के अन्दर तकरीबन डेढ़ दर्जन मजदूरों के दब जाने की घटना घटित हुई वहीं 15 नवम्बर 2025 को प्रदेश के मुख्यमंत्री “सोनभद्र में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस” कार्यक्रम में मौजूद थे, उनकी उपस्थिति के बावजूद राजनेताओं, शासन, प्रशासन की मिलीभगत से अवैध तरीके से खनन का काम धड़ल्ले से चलाया जा रहा था, दिन में लगभग तीन बजे माइन्स की बड़ी चट्टान नीचे गिरने से अन्दर काम पर लगे सभी मजदूर गहरी खदान के अन्दर ही दब गये। एक तरफ माननीय मुख्यमंत्री की उपस्थिति में “जनजाति गौरव दिवस” मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ जनजाति मजदूर माइन्स के अन्दर मौत की अन्तिम सांस ले रहे थे, अगर प्रशासन द्वारा समय पर उनको बाहर निकालने की त्वरित व्यवस्था की जाती तो उन मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।

घटना स्थल पर राजनैतिक पार्टियों के नेताओं, सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं को जाने से रोका जा रहा है, घटना को दबाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है जैसा कि प्रशासन अन्य घटनाओं में करता रहा है। राजनैतिक पार्टियों के नेताओं, सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं को घटना स्थल पर जाने से रोका जाना इस तथ्य की तरफ इशारा करता है कि प्रशासन घटना की लीपा — पोती करने में मुस्तैदी से लगा हुआ है, प्रशासन माइन्स के अन्दर दबे हुए मजदूर मर गए या जिन्दा हैं कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। इस हादसे ने खनिज विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। जिले में सैकड़ों खदानें बिना सुरक्षा मानकों के संचालित हो रही हैं। सोनभद्र में खनन सिंडिकेट का दबदबा काफी मजबूत होता जा रहा है , अवैध खनन खुलेआम जारी है। 15 नवंबर की यह घटना खनन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का भयावह उदाहरण बनकर सामने आया है।

निर्वाचन सप्तम् चरण में निर्धारित किया गया है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – सोनभद्र की जिला कमेटी इस दारुण घटना पर गहरा शोक व्यक्त करती है और पार्टी मृतक के परिजनों के साथ खड़ी है। पार्टी मांग करती है कि माइन्स के अन्दर फंसे हुए मजदूरों ( जिन्दा हों या मर चुके हों) को तत्काल बाहर निकाला जाए। मृतक मजदूरों के आश्रितों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा और उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाए। घटना की न्यायिक जांच कराया जाए और घटना में संलिप्त सभी दोषियों को कटघरे में लाकर कठोरतम कार्यवाही किया जाए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करके दोषियों को तत्काल सजा दिलाई जाय । पूरे सोनभद्र जिले में अवैध तरीके से किए जा रहे खनन पर प्रतिबन्ध लगा कर माइन्सों को घेर कर सील किया जाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस मांग को लेकर पार्टी द्वारा राष्ट्रपति और राज्यपाल को लिखित पत्रक भेज कर उनसे उपरोक्त मामले हस्तक्षेप और कार्यवाही की अपील की गई है ।

धरना प्रदर्शन के दौरान देश और प्रदेश में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों,महिलाओं,अल्पसंख्यकों के उपर अंधाधुंध किये जा रहे अत्याचार ( बलात्कार, हत्या, छेड़खानी, जातीय उत्पीड़न, धार्मिक उत्पीड़न, मावलिंचिंग, बुलडोजर संस्कृति, कानून व्यवस्था की अत्यन्त दयनीय स्थिति ) की घटनाओं के खिलाफ और किसानों, गरीबों व मजदूरों की जटिल समस्याओं को भी उठाया गया। धरना प्रदर्शन को प्रमुख रूप से पार्टी के राज्य कार्यकारिणी के सदस्य और जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा, देव कुमार विश्वकर्मा, बसावन गुप्ता, अमरनाथ सूर्य, बुद्धि सेन मिश्रा, राम दुलारे, नंदू यादव, बाबू लाल चेरो, नागेंद्र कुमार, विरेन्द्र कुमार गोंड़, तारकेश्वर गुप्ता, जगरनाथ बैगा, रामजनम कुशवाहा, धनुक पनीका आदि ने संबोधित किया।इस दौरान सैकड़ों की संख्या में भाकपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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