चुनाव से पहले बंगाल में बैन: बाइक रैली और डबल राइडिंग पर रोक, जानें वजह

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने मोटरसाइकिल के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाये हैं। आयोग द्वारा 20 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार की बाइक रैली की अनुमति नहीं होगी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह देखा गया है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी राजनीतिक दल बाइक रैलियां निकालते हैं, जिनके जरिए कई मामलों में मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है।

जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs), पुलिस कमिश्नरों और पुलिस अधीक्षकों को संबोधित एक आदेश में CEO ने कहा कि मोटरसाइकिल रैलियों पर पूरी तरह से बैन है, इसमें कोई छूट नहीं है। एक चुनाव अधिकारी ने कहा, "आयोग मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा, इसलिए बाइक रैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।" इसके अलावा, इस अवधि में शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक मोटरसाइकिलों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी, सिवाय आपात स्थितियों जैसे चिकित्सा या जरूरी पारिवारिक कारणों के।

बाइक पर पीछे बैठने पर भी रोक
इस आदेश में कहा गया है कि सुबह छह बजे से शाम छह बजे के बीच भी पिलियन राइडिंग (पीछे बैठकर सफर) पर रोक रहेगी, हालांकि चिकित्सा आपात स्थिति या आवश्यक कार्य जैसे स्कूल बच्चों को ले जाने की स्थिति में छूट दी जा सकती है। चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक, हालांकि, मतदान के दिन सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक सीमित छूट दी जाएगी, जिसमें परिवार के सदस्यों को मतदान और आवश्यक कार्यों के लिए दोपहिया वाहन पर यात्रा की अनुमति होगी।

बिहार में सरस्वती पूजा को लेकर सुरक्षा बढ़ाई गई, सोशल मीडिया पर विशेष नजर

संकरी गलियों से कैश या शराब ले जाने पर लगेगी रोक
CEO के दफ़्तर के एक अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक पार्टियां कभी-कभी संकरी गलियों और उप-गलियों से कैश या शराब ले जाने के लिए मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करती हैं, जहाँ आमतौर पर मुख्य सड़कों पर चार-पहिया वाहनों पर नजर रखने वाली चौकियाँ नहीं होतीं। उनके अनुसार, "इन पाबंदियों का मकसद मतदाताओं को प्रलोभन देने के इस तरीके को खत्म करना और बिना किसी हिंसा के चुनाव का माहौल सुनिश्चित करना है।" अधिकारियों को इन निर्देशों का व्यापक प्रचार करने और जिला पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिये गये हैं। यह कदम मतदान से पहले के 48 घंटे के मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की डराने-धमकाने की गतिविधियों, अवैध जुटान और चुनाव प्रक्रिया में बाधा को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

ऐप-आधारित डिलीवरी करने वालों के लिए मुश्किल
चुनाव आयोग के इस आदेश से ऐप-आधारित डिलीवरी करने वालों पर इसके लागू होने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इनमें से कई लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए मोटरसाइकिलों पर निर्भर हैं और पूरी रात काम करते हैं। इस निर्देश में बाइक चलाने वालों की इस श्रेणी का कोई खास ज़िक्र नहीं है। आदेश में DEOs और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के साथ-साथ ज़िला और ब्लॉक-स्तर के प्रचार तंत्र के ज़रिए इन पाबंदियों का व्यापक प्रचार करें, और इनके सख़्त पालन और निगरानी के लिए आपस में तालमेल बिठाएँ। आदेश में कहा गया है, "किसी भी ऐसे उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में कोई रुकावट या बाधा पैदा हो।"

सुनीता विलियम्स मंगलवार पृथ्वी पर वापस आएंगी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *