जिलाधिकारी से मांग, संस्कार भवन की बदहाली का जिम्मेदार कौन.? सिर्फ नाम है आदर्श नगर पंचायत !
जांच रिपोर्ट के बाद भी 7 साल से बंद पड़ा सामुदायिक भवन

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मीडिया हाउस न्यूज एजेन्सी सोनभद्र- आदर्श नगर पंचायत चोपन के माँ काली मंदिर परिसर में स्थित संस्कार/सामुदायिक भवन वर्षों से बदहाली का शिकार है। नगर का यह एकमात्र बहुउपयोगी सामुदायिक भवन वर्ष 2017 से बंद पड़ा है, जिससे शादी-विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए नगरवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बाद मामला जनसुनवाई पोर्टल तक पहुँचा। शिकायत के क्रम में पहले भी आख्या लगाई गई थी और हाल ही में लोक निर्माण विभाग (च्ॅक्) के जूनियर इंजीनियर द्वारा स्थल निरीक्षण कर वर्तमान तकनीकी आख्या प्रस्तुत की गई। हालांकि, पूर्व आख्या और वर्तमान आख्याकृदोनों में भवन की खामियों को स्वीकार किए जाने के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई शून्य च्ॅक् की जांच रिपोर्ट के बाद नगर पंचायत की ओर से यह कहा गया कि मामला “बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा।” सवाल यह है कि पिछले 7दृ8 वर्षों में कई बोर्ड बैठकें हो चुकी हैं, फिर भी संस्कार भवन के संबंध में कोई निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाया गया?
सवालों के घेरे में नगर पंचायत स्थानीय लोगों का कहना है कि 2012 के बाद से संस्कार भवन की दुर्दशा पर कोई गंभीर पहल नहीं हुई। नगर क्षेत्र में सुंदरीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने की बातें सामने आती रही हैं, लेकिन संस्कार भवन जैसे जनोपयोगी ढांचे की उपेक्षा प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
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मुख्य प्रश्न
जब भवन 2017 से बंद है, तो अब तक मरम्मत या पुनर्निर्माण क्यों नहीं हुआ?
पूर्व व वर्तमान जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई क्यों लंबित है?
यदि निर्माण या रखरखाव में खामियां पाई गईं, तो कार्यदायी संस्था पर क्या कार्रवाई हुई?
क्या नगर पंचायत की आय इतने वर्षों में भी भवन को उपयोग योग्य बनाने के लिए पर्याप्त नहीं थी?
जनहित हो रहा प्रभावित
संस्कार भवन के बंद होने से नगरवासियों को सामाजिक आयोजनों के लिए निजी भवनों या दूरस्थ स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
प्रशासन से अपेक्षा- नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूर्व व वर्तमान आख्या को एक साथ संज्ञान में लेकर मरम्मत/पुनर्निर्माण की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों व कार्यदायी संस्था की जवाबदेही निर्धारित की जाए, और भवन को शीघ्र जनता के लिए खोला जाए।











