उमर सरकार नहीं मानती है केंद्र शासित प्रदेश को, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की एक तस्वीर वायरल

जे एंड के का पढा लिखा युवा वर्ग भी चाहता है विशेष हक

अनिल भारद्वाज, मीडिया हाउस जम्मू/राजौरी –केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर विधानसभा में स्पेशल स्टेटस वाले 370 की बहाली को लेकर संग्राम थामने का नाम नहीं ले रहा, तो अब एक और विवाद छिड़ने की पूरी संभावना है कि जम्मू कश्मीर UT ( यूनियन टेरिटरी) है या स्टेट।

दरअसल एक फोटो वायरल हो रहा है जिसमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक पुल की नींव रख रहे हैं और साथ में जम्मू कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी भी हैं । देखने में तस्वीर साधारण है, लेकिन इस तस्वीर के पीछे कई सवाल छिपे हैं कि क्या JKUT की उमर सरकार अलग से संविधान को मानती है और LG मनोज सिंह अलग संविधान को मानते है?

दरअसल जो फाउंडेशन स्टोन की प्लेट लगाई गई है उसमें UT (Union Territory) का कहीं जिक्र नहीं किया गया और UT गायब है जबकि जम्मू कश्मीर को आधिकारिक तौर और भारतीय संविधान के तहत केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया है और सभी सरकारी दस्तावेजों पर JKUT लिखा जाता है लेकिन इस तस्वीर ने विवाद पैदा कर दिया कि जम्मू कश्मीर में दो निजाम कैसे चल सकते हैं ।

LG मनोज सिंहा जब किसी आधिकारिक फंक्शन या प्रोजेक्ट का उद्धघाटन करते हैं तो जम्मू कश्मीर UT लिखा जाता है और जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला किसी प्रोजेक्ट का उद्धघाटन करते हैं।

जिससे से संकेत मिल रहे हैं कि JKUT में दो सरकारों चल रही है एक उमर साहब की जो जम्मू कश्मीर को UT नहीं मानते और LG साहब की जो राज्य के पुनर्गठन के तहत जम्मू कश्मीर को UT मानते हैं।
वहीं सभी विधायकों ने जम्मू कश्मीर UT के तहत ही विधायक पद की शपथ ली और उमर अब्दुल्ला ने इसी के तहत मुख्यमंत्री की।

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दरअसल ये विवाद कोई नया नहीं इससे पहले भी ऐसा देखने को मिला जब LG मनोज सिंहा ने UT दिवस मनाया तो उमर सरकार ने इसे मानने से इंकार कर दिया क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस स्टेट की मांग कर रही है जो उसके घोषणापत्र में था लेकिन किसी सरकारी प्रोजेक्ट का उद्धघाटन रखा जाता है तो वहां से UT वर्ड गायब हो जाता है जिससे से समझना आसान हो गया है आने वाले दिनों में ये मुद्दा जरूर गरमाएगा।

वहीं बताते चले कि विशेष दर्जा प्राप्त राज्य जम्मू कश्मीर को UT में जब से शामिल किया गया है तब से आतंकवाद में कोई कमी नहीं देखी गई जबकि सड़कों और जंगलों में आतंकियों द्वारा घात लगाकर हमले किए गए। जिससे हमारा काफी नुकसान हुआ है आतंक ने कईं घर उजाड़ दिए। और नुकसान हो भी रहा है। हमले में ऐसी बर्भरता कर जाते हैं आतंकी के शहीद भारतीय जवानों का चेहरा देखना उनके घर बालों को नसीब नहीं होता है।

जम्मू कश्मीर में आतंकी संगठन के हुक्मरा लोग हमले के तुरंत बाद हमले की जिम्मेदारी ले लेते हैं। । नियंत्रण रेखा के साथ लगते और दुर्गम आतंक ग्रस्त इलाके में आतंक का खौफ इतना के भारतीय सेना कड़ी सुरक्षा के साथ सेना के काफिले को सुरक्षित जगह में पहुंचने तक आंख बंद नहीं कर सकती। जम्मू कश्मीर में आतंक से बचने के लिए भारतीय जवानों को कंट्रीली तारों के अंदर रखा जाता है। विदेशी नस्ल की बुलेट प्रूफ गाड़ियों की गिनती को बढ़ाया गया। हां घाटी में पत्थर बाज रुका है। टारगेट किलिंग बड़ी हैं। कश्मीर घाटी से गैर मुस्लिम लोगों का पलायन बड़ा है।

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भ्रष्टाचार बड़ा है, कईं सालों से विकास के कार्य रुके पड़े हुए हैं, उच्च शिक्षा प्राप्त युवा लोग सड़क किनारे रेहड़ी फड़ी लगाने को मजबूर है। UT बनने के बाद सरकारी स्कूल कॉलेज ठेके पर चलाए जा रहे हैं।
सरकारी स्कूल, कॉलेज , विश्वविद्यालयों में कईं सालों से अस्थाई तौर पर शिक्षा देने वाले लेक्चरर्स प्रोफेसर्स को क्लास में विद्यार्थी पूछते हैं कि आखिर पढ़ने लिखने के बाद हम भी ऐसे ही ठोकरें खाएंगे जैसे सर आप खा रहे हैं। वो आखिर जवाब क्या दें।

जम्मू कश्मीर के बड़े बड़े प्रोजेक्ट बाहरी राज्यों के रसूखदार ठेकेदारों को सौंप दिए गए। जहां तक कि लेवर बाहर कि गाड़ियां और अन्य मशीनरी बाहर से लाई जा रही हैं।और जम्मू कश्मीर के स्थानीय युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी में न के बराबर हिस्सेदारी दी गई।

बड़ी बड़ी सरकारी इमारतों, सड़कों, पुलों को लापरवाही में तैयार कर पास कर दिया गया। एजेंसियों की लापराही इतनी के फर्जी पुलिस अधिकारी सरेआम सड़कों पर घूमते हैं। अवैध ड्रग्स और कार्यों में बढ़ोतरी नहीं थमी। वहीं युवाओं का कहना है कि हम 370 नहीं पर स्पेशल स्टेट्स की मांग करते हैं। जम्मू कश्मीर का हक बाहर से आकर खाए हमें मंजूर नहीं।

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