अर्थ का मतलब वित्त नहीं, अर्थ से जुड़ा है हमारा परिवार और समाज।
सी20, जी-20 के देशों से जुड़े नागरिकों की भूमिका तय करता है।

मीडिया हाउस न्यूज एजेन्सी 3ता.रांची-जी20 से जुड़ी, नागरिकों के बीच उनका सुझाव लेने, उनके साथ काम करने वाली संस्था सी20 का एंबेसडर कार्यक्रम आज रांची के लालपुर स्थित बीआईटी एक्सटेंशन में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बीआईटी की निदेशक डॉ वंदना भट्टाचार्य ने की जबकि सी20 के एंबेसडर ऐश्वर्य सेठ ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद सांसद संजय सेठ ने जी-20 के साथ सी 20 के महत्व को बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अध्यापकों के बीच रखा।
सांसद श्री सेठ ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता भारत को मिलना, यह बताने के लिए पर्याप्त है कि आज भारत वैश्विक ताकतों के बीच विश्व का नेता बन कर उभरा है। ऐसे में जब हमारे नेता अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हो, देश को विकास की पटरी पर तेज रफ्तार से दौड़ आ रहे हो, तो हर देशवासी की जिम्मेदारी है कि इन आशाओं और अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा बेहतर करके दिखाएं। हमारी सोच, हमारी जिम्मेदारी है कि हम भारत की सोच और सामर्थ्य से, भारत की संस्कृति और समाज शक्ति से विश्व को परिचित कराएं। यह हमारा दायित्व है कि हम अपने हजारों लाखों वर्ष पुरानी संस्कृति की बौद्धिकता और उसमें समाहित आधुनिकता से विश्व को रूबरू कराएं। यह एक सुनहरा अवसर हम सबके लिए है। कहने को तो G-20, 20 देशों की अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संगठन है और यह सच भी है अर्थव्यवस्था या आर्थिक का मतलब सिर्फ वित्त से नहीं होता। आर्थिक का मतलब परिवार और समाज से भी जुड़ा होता है। अर्थ का मतलब हमारी सामाजिक जिम्मेदारियां भी होती है, हमारी पारिवारिक जिम्मेदारियां भी होती है। राष्ट्र के प्रति हमारा समर्पण होता है। हमने वित्त को अर्थ मानने की जो गलती की है, उसे सुधारने का यह अवसर है क्योंकि सिर्फ वित्त से देश नहीं चल सकता, जबकि भारतीय दर्शन में जिस अर्थ की बात की गई है, उस अर्थ से हम पूरी दुनिया को मार्गदर्शन दे सकते हैं। इसलिए तो भारत ने इस बैठक में एक पृथ्वी, एक कुटुंब और एक भविष्य का थीम दिया। 20 देश, जिनकी दुनिया की जीडीपी में 85% हिस्सेदारी है, जब एक साथ उठ खड़े होंगे, भारत के नेतृत्व में चलेंगे तो हम जिस विश्व गुरु की बात करते हैं, वह विश्व गुरु भारत बनेगा। इसलिए हम सभी नागरिक अपने पारिवारिक सामाजिक दायित्वों का निर्वहन बेहतर तरीके से करें। यह हमें सुनिश्चित करना होगा। G20 का मूल उद्देश्य मध्यम आय वर्ग वाले जो देश हैं, उनको वैश्विक स्थिरता प्रदान करना और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना भी है। जी 20 देशों में दुनिया की 60% आबादी, वैश्विक जीडीपी का 85% हिस्सेदार और वैश्विक व्यापार का 75% भागीदारी निभाने वाले देश शामिल है। यह आंकड़ों का जो प्रतिशत है, वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि G-20 वर्तमान समय में कितना महत्वपूर्ण संगठन बन चुका है। 23 वर्ष की आयु वाला यह संगठन वास्तव में अपने यौवन के दौर से गुजर रहा है।
सांसद ने कहा कि ऐसे में यह जिम्मेवारी हम सबकी है कि C-20 के माध्यम से अपने विचार सरकार तक पहुंचाएं। जी-20 की ऐसी इकाई सी20 है, जो नागरिकों की भूमिका तय करता है। भारत में होने वाला यह कार्यक्रम सी 20, यू आर द लाइट थीम पर हो रहा है। यह कोई छोटा थीम नहीं है। आप प्रकाश हैं, इस प्रकाश को प्रकाश से मिलाना है और आगे बढ़ते जाना है। भारत की अध्यक्षता में संपन्न हो रहे जी-20 की इस बैठक में सामाजिक, आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण और पुरातत्व संरक्षण पर भी बात हो रही है।
यह चारों ही चीजें सीधे-सीधे हम नागरिकों से जुड़ी है। समाज की बात करें, आर्थिक विकास की बात करें, पर्यावरण संरक्षण की बात करें, पुरातत्व संरक्षण की बात करें, यह सबमें हमारी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। हम अपनी संस्कृति, अपनी धरोहर के साथ मिलकर जितना आगे बढ़ेंगे, हमारा देश उतना ही आगे बढ़ेगा। हम सब अपनी भूमिका तय करें। अपने कर्तव्य का निर्वहन करें। जी-20 की सफलता सिर्फ भारत की सफलता नहीं है, इस देश के एक-एक नागरिक की सफलता है। अपने स्वागत भाषण में सी20 के एंबेस्डर ऐश्वर्य सेठ ने वसुधैव कुटुंबकम पर अपने विचार रखे। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से एस०डी० सिंह, आशीष सत्यव्रत साहू, डॉ० अभय रंजन श्रीवास्तव मौजूद रहे।










