शिष्य ने गुरु का आशीर्वाद माथे पर तिलक लगाकर पैर को धोकर ली चरणामृत
सात समुंद्र की मसि करूं, लेखनी सब वनराय। सब धरती कागद करूं, ता पर गुरु गुण लिखा ना जाय।

मीडिया हाऊस न्यूज एजेंसी बनारस। अनंत काल से गुरु की महता पूरे ब्रह्मांड में सदियों से गूंजता व पूजता चला आ रहा है। इसी कड़ी में लोकमंत्र के संवाददाता बगहा से नरेंद्र पांडेय ने काशी विश्वनाथ कैलाश मठ में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पहुंचे जहां गुरु शिष्य की परंपरागत सेवा भावना को देखा और जिंदगी की पहली और आखिरी भावनाओं से विभोर होकर जिंदगी कृतज्ञ हो गई। इसी दौरान कैलाश मठ के मठाधीश बोले गुरु.. आशुतोषानंद जी महराज, राघवा नंद जी महराज अच्युतानंद जी महराज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने संयुक्त रूप से शिष्यों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि भारत के सनातन धर्म संस्कृति में गुरु स्थान सर्वोपरि होता है। हमारे गुरु जी को आज भगवान श्रीराम जी की गुरुपूजन याद आती है। जो विश्व कल्याणकारी मर्यादा पुरूषोतम राम ने गुरु विचार , गुरु विश्वाश, गुरु निर्णय, गुरु प्रतिमा स्वरूपा, गुरु कल्याण गुरुवे नमः से अलंकृत है ।जो कि विश्व के मानस पटल पर गुरु शिष्य का बेहतर उदाहरण पेश किया था। आज की परिवेश में साधु संत महात्माओं ने इस परम्परा को जीवित रखा है जो विश्व कीर्तमान है। वहीं गुरुवार को मठ परिसर में गुरु पूर्णिमा के दिन भक्ति सागर में हजारों शिष्यों गोता लगाया। वहीं 56भोग का प्रसाद बना कर शिष्य ने गुरु को ग्रहण कराया। इसके पहले सैकड़ों गुरुओं को माथे पर तिलक चन्दन लगा कर अंग वस्त्र तथा दान स्वरूपा नकद राशि देकर अपनी महती भूमिका को आच्छादित किया गया। उसी क्रम में बिहार के पटना से शिष्य प्रसिद्ध कपड़ा व्यवसाई रौशन कुमार सहित यूपी बिहार से लगभग हजारों शिष्यों ने आज आशीर्वाद लेने काशी नगरी कैलाश मठ पहुंचे थे।
मानो तो देव नहीं तो पत्थर.. इंसान इस युग में विद्वान भी है,और मूर्ख भी है। जिसने समय को पहचाना समय के महत्व को परखा उस व्यक्ति की जिंदगी कृतज्ञ हो जाती है। जो विश्वास ही गुरु है जिंदगी इसकी असली शिष्य है।










