आदिवासी बाहुल्य गांव खिलौड़ी का चुनेरभुज और बांसकोदरी टोला अब तक अंधेरे में

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 11ता.दुमका।जहाँ देश आजादी का 76 वर्षगाठ मनाने वाला है वही झारखण्ड राज्य के दुमका जिला के काठीकुंड प्रखंड के बड़तल्ला पंचायत के अन्तर्गत आदिवासी बाहुल्य गांव खिलौड़ी का चुनेरभुज और बांसकोदरी टोला अब तक अंधेरे में है.आजादी के इतने वर्ष होने के बाद भी इस इन दोनों टोला में आदिवासियों को बिजली नसीब नहीं हुआ है.जहाँ एक ओर झारखण्ड सरकार और प्रशासन विश्व आदिवासी दिवस पर जश्न मना रही है वही आदिवासी बाहुल्य गांव खिलौड़ी का चुनेरभुज और बांसकोदरी टोला मुलभुत सुविधाओ से वंचित है.बिजली के लिय ग्रामीणों ने सभी जगह दस्तक दिए लेकिन किसी ने भी पहल नहीं किया.ग्रामीणों का कहना है जन प्रतिनिधि से लेकर बिजली विभाग,BDO और जनता दरबार में आवेदन देते देते थक गये लेकिन अब तक इन दोनों टोला में बिजली नहीं आया.ग्रामीण आगे कहते है कि बिजली विभाग दुमका में आवेदन देने पर विभाग कहता है कि कागज में आपके पुरे गांव में बिजली है.इस पर ग्रामीण कहते है कि विभाग जाकर जाँच कर ले बिजली है कि नहीं है ? इन दोनों टोला में अब तक न बिजली का पोल गाड़ा गया,न ट्रांफरमर लगाया गया है और न ही बिजली का तार लगाया गया है ? इस पर बिजली विभाग न जाँच कर रही है और न ही बिजली लगवा रही है.ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने के कारण बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.बच्चो को शाम में पढने में दिक्कत होती है,जंगली इलाका होने के कारण अधेरे में साफ-बिच्छु का डर बना रहता है.बिजली नहीं होने के कारण मोबाइल भी चार्ज करना बहुत मुश्किल हो जाता है,मोबाइल दुसरे गांव या सोलर से चार्ज करना पड़ता है.आदिवासी बच्चे बहुत मुश्किल से सोलर से बैटरी चार्ज कर एलएडी(LED)लाइट जला कर पढ़ते है.लाइट प्रयाप्त नहीं होने के कारण बच्चो के आँखों में प्रतिकूल असर पड़ रहा है.आवेदन और मिडिया/अख़बार में खबर छपने के बाद भी बिजली विभाग के उदासीनता के कारण दोनों टोला में बिजली नही आने से ग्रामीण काफी नाराज है.ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री,प्रशासन और जन प्रतिनिधियो से मांग किया है कि जल्द ही बिजली दोनों टोला में दिया जाय नहीं तो सड़क में उतर कर आन्दोलन करने के लिय बाध्य होगे.इस मौके में सोनेलाल देहरी,परमेश्वर देहरी,युधिष्टिर देहरी,बुधन देहरी,बसु देहरी,देसाई देहरी, सिमा देवी,संगीता देवी,फुलमनी महारानी,लखन कुमार देहरी,रासमुनि रानी,लक्ष्मी रानी,बुधनी महारानी,फुलमनी महारानी,संगीता देवी,अक्लो देहरी,लखन कुमार देहरी के साथ काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.










